पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर और ईरान को लेकर बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है. उन्होंने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ ईरान ने दिया था. हालांकि उन्होंने इस खुलासे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन ईरान और पाकिस्तान के रिश्ते अब सुधर रहे हैं. जून 2025 में और फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध में ईरान को पाकिस्तान ने मजबूत कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन दिया. मई 2025 में भारत के खिलाफ जंग में भी ईरान ने भी पाकिस्तान का जबरदस्त साथ दिया था.

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इशाक डार आभार जताने के लिए गए थे ईरान

इशाक डार ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह दावा किया था. इशाक डार मई 2025 में ईरान के दौरे पर गए थे और इस यात्रा का मकसद भारत के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान का साथ देने के लिए शुक्रिया अदा करना था. लेकिन इशाक डार ने यह नहीं बताया कि ईरान से समर्थन लेने के पीछे पाकिस्तान का मकसद क्या है? बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद 7 मई 2025 को पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इसके बाद 4 दिन के हिंसक टकराव के बाद सीजफायर हो गया था.

भारत-पाक टकराव पर ईरान ने क्या कहा था?

इशाक डार के दावे की सच्चाई की बात करें तो जब पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था और पाकिस्तान ने पलटवार किया था, तब ईरान ने दोनों देशों से संयम बरतने और तनाव को बातचीत के जरिए दूर करने की सलाह दी थी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस समय दोनों देशों का दौरा किया था. अराघची ने तर्क दिया था कि ईरान के भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ दोस्ताना संबंध हैं. लेकिन अब इशाक डार का यह कहना है कि ईरान ने भारत के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान का साथ दिया था, उनके नापाक इरादों का संकेत देता है.

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दुनिया में अलग-थलग पड़ गया था पाकिस्तान

पहलगाम आतंकी हमला कराने के आरोप पाकिस्तान पर लगे थे और पूरी दुनिया में आतंकी हमले की निंदा की थी. उस समय पाकिस्तान इंटरनेशनल लेवल राजनयिक रूप से अलग-थलग पड़ गया था. क्योंकि दुनिया के ज्यादातर देशों ने पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन किया था. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया था कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से सिर्फ 3 देशों ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत के रुख का विरोध किया. ज्यादातर देशों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया.

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