अमेरिका और ईरान के बार फिर आमने-सामने हैं, दोनों के बीच ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. इस टकराव का मतलब है कि एक बार फिर ग्लोबल एनर्जी संकट का खतरा गहरा हो सकता है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बार-बार बंद करने की धमकियां दी जा रही हैं और हाल ही में कुछ कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों ने सभी की चिंता बढ़ा दी है. लेकिन शायद इस बार को भारत को इस संकट से उतना असर नहीं पड़ेगा, जितना पहले पड़ा था. भारत ने पिछले 90 दिनों में जिन तकलीफों का सामना किया, उस दौरान उसने ऐसी प्लानिंग कर ली, जिससे वो संकट के वक्त तैयार रहेगा. भारत ने क्रूड ऑयल की सप्लाई में बदलाव किए, स्पॉट मार्केट से खरीदारी बढ़ाई और तेल के लिए लंबे वक्त तक खाड़ी देशों पर डिपेंड रहना कम किया. मार्च से अब तक की बात करें तो, भारत ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में आने वाली चुनौतियों का डटकर सामना कर पाएगा.
क्या है भारत की तैयारी?
मार्च में जब अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू हुआ तो पूरी दुनिया में तेल-गैस की सप्लाई को लेकर आ रही कमी से हाहाकार मचने लगा. इसी बीच भारत ने स्मार्ट एक्शन लेते हुए अपनी एनर्जी सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी को बदलना शुरू कर दिया. देश की रिफाइनरियों ने कई अहम कदम उठाए, जिनमें क्रूड ऑयल की खरीदारी में डायवर्सिटी लाना, स्पॉट मार्केट से खरीदारी बढ़ाना शामिल हैं. इसके अलावा भारत ने रूस, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका जैसे देशों से इम्पोर्ट बढ़ाया है ताकि भविष्य में किसी तरह की मुश्किल ना आए. जिस तरह के हालात अभी मिडिल ईस्ट में जारी हैं, भारत ने ये कदम उन्हीं झटकों को कम करने के लिए उठाया है.
भारत की प्लानिंग
अगर ईरान-अमेरिका के बीच में तनाव लंबा खिंचता है तो होर्मुज स्ट्रेट के बंद रहने से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. इन सबके बीच भारत को सप्लायर्स का बड़ा बेस और खरीदारी के बेहतर ऑप्शन राहत इस संकट की घड़ी में राहत दे सकते हैं.
भारत की ऑयल सप्लाई में डायवर्सिटी लाने का पहला स्टेप है- सप्लायर्स बदलना. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन रिफाइनरी कंपनियां अब गुयाना, अमेरिका और ब्राज़ील जैसे देशों से सप्लाई लेने का प्लान बना रही है. भारत ने इस पर अप्रैल से ही काम करना शुरू कर दिया था. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अप्रैल में वेनेजुएला से करीब 12.51 मिलियन बैरल कच्चा तेल इम्पोर्ट किया. इंडिया का दूसरा स्टेप था- ऑयल मार्केट में शॉर्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट और स्पॉट खरीद. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन रिफाइनरी कंपनियां पुराने विदेशी सप्लायर्स से अब कच्चे तेल की मात्रा कम करने और स्पॉ
मार्केट से खरीद पर ज्यादा डिपेंड रहने का प्लान बना रही है.
ये भी पढ़ें: US Iran War LIVE Updates: अमेरिका की ईरान पर फिर एयर स्ट्राइक, कई इलाकों में बरसाए बम
संबंधित खबरें
अब आम आदमी भी दे सकेगा घुसपैठ-डेमोग्राफी में बदलाव की जानकारी, पोर्टल लॉन्च
1 hr ago'बहाने नहीं चलेंगे', वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं मिलने पर SC ने EC को लगाई फटकार
1 hr ago'आप देश को क्यों बर्बाद कर रहे हो...', एयरपोर्ट पर दीपके को लोगों ने घेरा
3 hrs ago'न्याय के इंतजार में अंकिता भंडारी', माता-पिता से मिलकर बोले राहुल गांधी
4 hrs agoसुप्रीम कोर्ट पहुंचा जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट बैन का मामला, याचिका दाखिल
7 hrs agoदिव्यांगों को जन्म से 40% पेंशन, मोदी कैबिनेट ने लिए कई बड़े फैसले
7 hrs agoदिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, 78 दिनों का मिलेगा बोनस
8 hrs ago'हम आपके पैरों पर गिरकर माफी मांगते हैं...' हिरासत पर क्या बोले ध्रुव राठी?
8 hrs agoकोलकाता राजधानी के फर्स्ट AC में पुराने कंबल नहीं, मिलेंगे फ्लोरल कम्फर्टर
9 hrs ago'गला दबाया, चेहरा नाखूनों से नोचा', राहुल ने NSUI छात्रा को बताया शेरनी
10 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines