सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का की मस्जिद में बांग्लादेशी जोड़े को अश्लील हरकतें करते पकड़ा गया था, जिन्हें 14 अक्टूबर को मौत की सजा दी गई. अब तक सजा-ए-मौत के बारे में बांग्लादेशी दूतावास को नहीं बताया गया है. न ही मीडिया को यह बताया कि दोनों दोषियों ने क्या अश्लील हरकत की थी? उन्हें कब गिरफ्तार किया गया था? लेकिन दोषियों की पहचान नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सिती अख्तर के रूप में की गई है. जेद्दा कोर्ट ने इस्लामी कानून यानी शरिया के हिसाब से सुनवाई की और सजा सुनाई. सजा को उच्च अदालत ने भी बरकरार रखा है, सामाजिक नियम तोड़ने, मस्जिद जैसी पवित्र जगह की मर्यादा का अपमान करने पर मौत की सजा सुनाई गई.
विदेशी नागरिकों पर भारतीयों जैसे लागू होते कानून
वहीं मौत की सजा का शाही आदेश सऊदी के शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद ने जारी किया था. ऐसे में भारत में अगर कोई विदेशी नागरिक अपराध करते हुए पकड़ा जाता है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) उसी तरह लागू होती हैं, जैसे भारतीय नागरिकों पर लागू होती हैं. भारत में अपराध करने वाले विदेशी नागरिकों पर भी FIR हो सकती है, कोर्ट केस चलाया जा सकता है, जेल या फांसी की सजा भी सुनाई जा सकती है. सजा पूरी होने के बाद उन्हें उनके देश डिपोर्ट किया जा सकता है. सजा सुनाने के बाद उनके देश डिपोर्ट करके वहीं की जेल में सजा पूरी कराई जा सकती है. वियना कन्वेंशन 1963 के तहत उन्हें उनके दूतावास की तरफ से मदद की जा सकती है.
भारत में अपराध करने वाले विदेशियों के लिए कानून
विदेशी नागरिक भारत में गंभीर या जघन्य अपराध करे तो भारतीय कानून के तहत उसे अरेस्ट किया जा सकता है और भारतीय अदालतों में उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है. क्योंकि विदेशियों को भारतीयों की तरह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत कानून के समक्ष समानता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है. लेकिन अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सभा-रैली करने का अधिकार प्राप्त है. वहीं अनुच्छेद 22 के तहत भारतीयों की तहत विदेशी नागरिकों को भी गिरफ्तारी के कारण जानने, वकील से सलाह लेने और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेशी का अधिकार प्राप्त है. विदेशी नागरिक को अरेस्ट करने पर संबंधित देश के दूतावास या कॉन्स्युलेट को बताना अनिवार्य है.
भारतीयों की तरह जमानत ले सकते विदेशी नागरिक
भारतीयों की तरह विदेशी नागरिक भी जमानत ले सकते हैं, लेकिन अदालतें उनके पासपोर्ट जब्त करने, पुलिस थाने में रेगुलर उपस्थित रहने या FRRO में रिपोर्ट करने की शर्तें लगा सकती हैं. वहीं अगर विदेशी नागरिक के पास भारत में कोई स्थायी पता न हो तो उसे जमानत देने से इनकार भी किया जा सकता है. कुछ मामले में भारत सरकार या अदालतें विदेश नागरिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या कोर्ट केस की बजाय उसे देश निकाला देकर उसके देश वापस डिपोर्ट किया जा सकता है. भारत में दोबारा एंट्री करने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. क्योंकि भारत आने वाले विदेशियों पर विदेशी अधिनियम 1946 और अन्य इमिग्रेशन नियम लागू होते हैं, जिनका उल्लंघन न करने के सख्त निर्देश उन्हें दिए जाते हैं.
भारतीयों की तरह जेल की सजा या जुर्माना दोनों
बता दें कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत चोरी, धोखाधड़ी, हत्या, या मादक पदार्थों की तस्करी (NDPS एक्ट) करने वाले विदेशी नागरिकों को जेल की सजा दी जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है. विदेशी अधिनियम 1946, पासपोर्ट अधिनियम, या वीजा नियमों के उल्लंघन, अवैध तरीके से रहना या वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी रुकने पर 5 साल तक की जेल हो सकती है और जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं दोषी ठहराए जाने पर भारतीय जेल में ही सजा काटनी होगी और सजा पूरी होने के बाद उसे डिपोर्ट किया जाएगा, लेकिन अगर विदेशी नागरिक के देश के साथ प्रत्यर्पण संधि हुई हो तो सजायाफ्ता विदेशी नागरिक को सजा काटने के लिए उसके देश शिफ्ट किया जा सकता.
भारतीयों की तरह सजा को चैलेंज करने का अधिकार
भारत में अपराध करने वाले विदेशी नागरिक को भी मौत की सजा दी जा सकती है. लेकिन आतंकी गतिविधियों, देशद्रोह या क्रूरता से भरा अपराध यानी मर्डर या गैंगरेप करने पर ही फांसी दी जा सकती है. भारतीयों की तरह ही विदेशी नगारिक भी निचली अदलात के फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज कर सकते हैं या विशेष अनुमति याचिका (SLP) डाल सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट के बाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत भारत के राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दे सकते हैं. राष्ट्रपति को भारतीयों की तरह विदेशी नागरिकों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने या माफ करने का अधिकार होता है. वियना कन्वेंशन 1963 के तहत विदेशी नागरिका को उसके देश के दूतावास की ओर से भारत में वकील या अन्य और राजनयिक मदद उपलब्ध कराई जा सकता है. सरकार दूतावास के जरिए भारत सरकार से सजा घटाने या प्रत्यर्पण की अपील कर सकती है.