उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सौरभ राजपूत मर्डर में कोर्ट का फैसला आ गया है. मेरठ कोर्ट के जज अरविंद मिश्रा ने हत्याकांड के मुख्य आरोपियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है. लेकिन सजा सुनने के बाद जज अरविंद मिश्रा के एक अंदाज की खूब चर्चा हो रही है. दरअसल, मुस्कान-साहिल को फांसी देने का ऐलान करते हुए जज ने पेन को कूड़ेदार में फेंका दिया. आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया? क्या यह कोई अदालती नियम है? क्या कोई परंपरा है या कोई और वजह है? इस तरह के सवाल लोगों के जेहन में हैं और इनका जवाब भी जानना चाहते हैं तो आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर जज अरविंद मिश्रा ने पेन को डस्टबिन में क्यों फेंक दिया था?
भारत में निब तोड़ने की परंपरा कैसे बनी?
बता दें कि फांसी की सजा सुनाते हुए पेन की निब तोड़ने की परंपरा कोई नियम नहीं, बल्कि एक परंपरा है. यह परंपरा इंगलैंड में अंग्रेज निभाया करते थे और जब वे भारत पर राज करने आए तो इस परपंरा को साथ लेकर आए. समय के साथ-साथ अंग्रेजों की परंपरा भारत की परंपरा बन गई. तब से आज तक जब भी जज किसी दोषी को फांसी की सजा तो पेन की निब तोड़ देते हैं. क्योंकि आजकल निब वाले पेन इस्तेमाल नहीं किए जाते हैं, इसलिए परंपरा निभाते हुए पेन को डस्टबिन में फेंक दिया जाता है, क्योंकि बॉल पेन या जेल पेन की निब आसानी से टूटती नहीं है. इसलिए मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाते ही मेरठ के जज अरविंद मिश्रा ने पेन को कूड़े में फेंक दिया.
क्यों निभाई जाती है निब तोड़ने की परंपरा?
निब तोड़ने की परंपरा इसलिए निभाई जाती है, ताकि उस पेन को खत्म किया जा सके, जिससे दोषी को फांसी का फरमान लिखा गया है और हस्ताक्षर किए गए हैं. निब इसलिए भी तोड़ी जाती है, ताकि उस पेन को दोबारा इस्तेमाल न किया जा सके. माना जाता है कि जिस पेन से फांसी की सजा लिखी गई है, उस पेन से कोई अन्य कार्य या हस्ताक्षर नहीं होने चाहिए. निब तोड़ने का मतलब यह भी है कि फांसी की सजा का फैसला अंतिम है और इसे बदला या वापस नहीं लिया जा सकता. खुद सजा लिखने वाले जज भी न फैसले को बदल सकते हैं और न ही वापस ले सकते हैं. निब तोड़ने का मतलब यह है कि जज ने फांसी देने का फैसला संवेदनशीलता, गंभीरता और भारी मन से लिया है.
क्या है मेरठ का सौरभ राजपूत मर्डर केस?
मार्च 2025 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला निवासी मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत की हत्या की गई थी. सौरभ को उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर मौत के घाट उतारा गया था. मुस्कान ने सौरभ को नींद की गोली देकर सुलाया और प्रेमी साहिल को बुलाकर नींद में ही तेजधार हथियार से सीने में वार करके उसे मार दिया. फिर शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट-रेत घोलकर डाल दिया. 3-4 मार्च की रात को वारदात अंजाम देने के बाद मुस्कान और साहिल घूमने के लिए हिमाचल चले गए थे, जहां मुस्कान ने साहिल का बर्थडे सेलिब्रेट किया. 17 मार्च को दोनों वापस आए और मुस्कान ने अपने माता-पिता के सामने अपना गुनाह कबूल लिया.
मुस्कान ने खुद कबूल किया था गुनाह
बेटी मुस्कान रस्तोगी की करतूत का पता चलते ही माता-पिता उसे लेकर थाने गए, जहां पुलिस ने मुस्कान को गिरफ्तार करके वारदात का खुलासा किया. मुस्कान के प्रेमी साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया और सौरभ राजपूत का शव बरामद किया. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो गवाह सामने आए और उन लोगों ने भी साहिल-मुस्कान की पहचान की, जिनसे उन्होंने चाकू, नींद की दवाई और नीला ड्रम खरीदा था. 590 दिन यानी 13 महीने कोर्ट का ट्रायल चला, 126 सुनवाइयां हुईं और 26 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए. इस बीच मुस्कान की प्रेग्नेंसी का खुलासा भी हुआ और जेल में ही उसने नवंबर 2025 में एक बेटी को जन्म दिया. इससे पहले सौरभ-मुस्कान की एक बेटी है, जो नाना-नानी के पास रहती है.