भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर हेग कोर्ट के फैसले को ठुकरा दिया है और स्पष्ट किया है कि भारत के संप्रभु फैसलों पर निर्णय लेने का अधिकार हेग कोर्ट को नहीं है. सिंधु जल संधि सस्पेंड रहेगी और भारत अपने रुख पर अडिग रहेगा. सिंधु नदी के पानी को पाकिस्तान के साथ बांटने को लेकर संधि का पालन करने का कोर्ट का आग्रह मान्य नहीं है. पिछले साल 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को दंड देने के लिए संधि को सस्पेंड किया गया था और यह फैसला लागू रहेगा.

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भारत का संधि सस्पेंड रखने का रुख अडिग

सिंधु जल संधि पर भारत के रुख को लेकर हेग कोर्ट ने कहा कि भारत के पास सिंधु जल संधि को खत्म करने या सस्पेंड करने का कोई औचित्य नहीं है. सितंबर 1960 में लागू की गई सिंधु जल संधि का उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के बंटवारे को कंट्रोल करना था. लेकिन भारत ने कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते, इसलिए सिंधु जल संधि तब तक सस्पेंड रहेगी, जब तक पाकिस्तान की धरती से आतंकियों और आतंकी संगठनों का खात्मा नहीं होगा और पाकिस्तान एक्शन नहीं लेता.

भारत ने हेग कोर्ट को अवैध न्यायालय बताया

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि हेग कोर्ट का गठन विश्व बैंक के द्वारा संधि की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए किया गया था और भारत इसके फैसले को स्पष्ट रूप से खारिज करता है. भारत ने इस अवैध अदालत को कभी मान्यता नहीं दी है और यह कहता रहेगा कि इस कोर्ट की स्थापना ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है. पाकिस्तान ने सिंधु नदी प्रणाली की पश्चिमी नदियों पर बनी भारत की किशनगंगा और रैटल जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन पर आपत्ति जताई और कोर्ट से मध्यस्थता की मांग की थी.

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भारत ने कोर्ट की मध्यस्थता पर आपत्ति जताई

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने शुरू से ही भारत-पाकिस्तान के मामले में हेग कोर्ट की मध्यस्थता प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है. विवाद तकनीकी हैं और संधि के अनुसार इनकी जांच निष्पक्ष विशेषज्ञ के द्वारा की जानी चाहिए. भारत इस कोर्ट में कभी अपना पक्ष नहीं रखेगा और न ही वह कभी इस कोर्ट के सामने पेश होगा. हेग कोर्ट को भारत के संप्रभु निर्णयों पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं है. इसके फैसले भारत की जलविद्युत परियोजनाओं के संबंध में की गई कार्रवाइयों पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगे. सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का निर्णय बिल्कुल सही है और आगे भी लागू रहेगा. यही पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी सजा है.

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