अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार ने ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर ने देश की विदेश नीति को लेकर बड़ा बयान दिया. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि विपक्ष ने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका पर चिंता जताई है, जिसपर एस. जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि भारत ‘दलाल देश’ नहीं बन सकता. दरअसल, हाल के दिनों में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की पेशकश की है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि उनका देश दोनों देशों के बीच बातचीत की मेजबानी करने के लिए तैयार है.
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भारत के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत की विदेश नीति किसी तीसरे देश के जरिए नहीं चलेगी. उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, बल्कि ये दशकों से होता रहा है. विदेश मंत्री ने कहा कि मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान की भूमिका नई नहीं है और ये 1981 से जारी है, जिसमें वॉशिंगटन ने सालों से तेहरान के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए इस्लामाबाद का इस्तेमाल एक चैनल के रूप में किया है. सूत्रों के मुताबिक, जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की मध्यस्थता की कोशिशों में कुछ भी नया नहीं है. ये बयान उन खबरों के बाद आया है जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के साथ मिलकर शांति स्थापित करने के लिए गुप्त कोशिश कर रहा है.
‘ट्रंप को भारत ने दिया था संदेश’
शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से भी बात की और बढ़ते तनाव पर चिंता जाहिर करते हुए तनाव कम करने की अपील की. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शरीफ की टिप्पणी को ट्रुथ सोशल पर साझा करके और भी पुख्ता किया. इससे पहले, ट्रम्प ने कहा था कि वॉशिंगटन तेहरान के साथ बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत का हवाला देते हुए ईरानी पावर प्लांट पर हमलों को पांच दिनों के लिए रोक देगा. सरकार ने विपक्ष को ये भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को ये संदेश दिया था कि पश्चिम एशिया में युद्ध जल्द से जल्द खत्म होना चाहिए, क्योंकि इससे सभी पक्षों को नुकसान हो रहा है. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में संसद में आयोजित इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे. साथ ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जेडीयू और सीपीआईएम समेत सभी दलों के नेता भी मौजूद थे.
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