भारत-म्यांमार सीमा विवाद को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. सालों से लंबित इस सीमा विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए एक बड़ी कोशिश की जा रही है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा है कि सीमा के कुछ अनसुलझे हिस्सों पर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है. खबरों के मुताबिक मणिपुर सीमा पर बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच करीब 1.4 वर्ग मील जमीन की अदला-बदली के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है. यह इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में पड़ता है जो म्यांमार की काबाव घाटी से सटा है. दोनों देशों के बीच करीब 1643 किलोमीटर लंबी सीमा है. इसमें से लगभग 171 किलोमीटर हिस्सा अभी तक पूरी तरह तय नहीं हो पाया है.
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बाड़ लगाने की प्रक्रिया में तेजी
जमीन की अदला-बदली के इस संभावित प्रस्ताव का मुख्य मकसद सीमा को पूरी तरह से तय करना है. सीमा तय होने के बाद भारत सरकार वहां पक्की बाड़ लगा सकेगी. इससे अवैध घुसपैठ, उग्रवादियों की आवाजाही और सीमा पार होने वाले अपराधों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी. भारत सरकार ने पहले ही फ्री मूवमेंट रिजीम को खत्म कर दिया है. इसके तहत सीमा के पास रहने वाले लोग बिना वीजा के 16 किलोमीटर तक आ-जा सकते थे. भारत का मानना है कि म्यांमार के साथ कोई बड़ा विवाद नहीं है. केवल नौ सीमा स्तंभों से जुड़ा मामला है जिसे आपसी सहमति से सुलझाया जा रहा है.
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मणिपुर के नागरिक संगठनों ने दी कड़ी चेतावनी
जमीन की अदला-बदली की इन खबरों के सामने आते ही मणिपुर में विरोध प्रदर्शन के सुर तेज हो गए हैं. मैतेई नागरिक समाज संगठनों की संस्था COCOMI ने केंद्र सरकार को साफ चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि राज्य की जमीन का एक छोटा सा हिस्सा भी म्यांमार को नहीं दिया जाना चाहिए. संगठन ने कहा कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. अगर सरकार ऐसा कोई कदम उठाती है तो राज्य के लोग चुप नहीं बैठेंगे और बड़ा आंदोलन करेंगे. संगठन के अनुसार 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद से मणिपुर ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा पहले ही खो दिया है.
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