Divorce Case: तलाक के मामले अक्सर ही लंबे खिंचते हैं लेकिन यहां जिस मामले का जिक्र किया जा रहा है वो ना सिर्फ लंबा खिंचा बल्कि शादी की महाभारत जैसा हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्पेशल पावर का इस्तेमाल करते हुए इस कपल का तलाक सेटल किया है. कोर्ट ने कहा कि यह शादी हर प्रैक्टिकल कारण से खत्म हो चुकी है और इस हद पार कर चुके मामले को खत्म करने के लिए तलाक को फाइनल करना ही सही समझा. इस दंपति ने साल 2010 में शादी की थी जिसके बाद इनके 2 बेटे हुए. दोनों का रिश्ता साल दर साल बिगड़ता गया और दोनों ने आखिर 2016 में अलग होने का फैसला लिया. लेकिन, आगे जो हुआ उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी.
पति ने दर्ज कराए 80 मामले
पत्नी के वकील ने कोर्ट में बताया कि पति प्रैक्टिसिंग एडवोकेट यानी वकील है और अपनी वकालत का गलत फायदा उठाते हुए उसने पत्नी, उसके परिवार और वकील के खिलाफ 80 से ज्यादा कानूनी कार्यवाही के मामले दर्ज कराएं हैं. वहीं, पति पर यह इल्जाम लगाया गया कि उसने ना फैमिली कोर्ट का आदेश माना और ना ही पत्नी को मेंटेनेन्स देने का हाई कोर्ट का आदेश माना. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अपने ओर्डर में कहा कि पति कई कंपनियो में डायरेक्टर के पद पर है लेकिन अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों से बचने के लिए उसने इन पदों पर होने से इंकार कर दिया है.
पत्नी मुंबई के लोखंडवाला में 3BHK फ्लैट में रह रही थी जोकि उसके ससुर का फ्लैट है. अपना खर्च चलाने के लिए पत्नी ने कोलकाता में काम करना शुरू कर दिया था लेकिन अब अपने बेटों की पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए वापस मुंबई शिप्ट हो रही है.
पति ने कहा पत्नी की वजह से झेलनी पड़ी प्रताड़ना
पति ने कोर्ट में आकर बताया कि उसके खिलाफ पत्नी ने आपराधिक मामले दर्ज किए थे जिसमें घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम 2005 और भारतीय दंड संहिता की धारा 49A शामिल हैं. पति ने बताया कि इन दोनों मामलों के कारण उसे कुछ दिन जेल में भी बिताने पड़े जोकि इसके लिए ट्रॉमेटिक अनुभव रहे, उसे मानसिक कष्ट से गुजरना पड़ा और उसकी प्रोफेशनल रेप्यूटेशन खराब हुई सो अलग. पति ने यह भी शिकायत की कि उसकी पत्नी ने उसे अपने बच्चों से बहुत ही सिस्टमेटिक तरीके से अलग कर दिया है. पति ने दावा किया कि उसकी पत्नी पढ़ी-लिखी है और खुद का खर्च मैनेज कर सकती है फिर भी उसने मेंटेनेंस के लिए खुद को निराश्रित के रूप में पेश किया है. पति ने बताया कि वह अबतक पत्नी को 45 लाख रुपए दे चुका है.
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया
पति को लगभग फटकारते हुए कोर्ट ने बताया कि पति ने जो शिकायतें दर्ज करवाई हैं उसके कारण कोर्ट की कार्यवाही में बाधा आई और ये शिकायतें प्रतिशोधात्मक और कष्टप्रद प्रतीत होती हैं. कोर्ट ने कहा कि वह समझ सकता है कि क्यों पत्नी को अपने पति के साथ शादीशुदा जीवन बिताने में कठिनाई हुई होगी. कोर्ट ने कहा कि भले ही पत्नी पढ़ी-लिखी और पेशेवर रूप से योग्य हो, लेकिन यह प्रतिवादी पति का अपनी पत्नी, और बच्चों की देखभाल के लिए वैवाहिक, पैतृक, नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त होने का कारण नहीं हो सकता है.
कोर्ट ने आदेश दिया कि शादी को खंडित किया जाता है और पत्नी, उसके परिवार या वकीलों के खिलाफ जितने भी मामले, याचिकाएं, FIR या शिकायतें कोर्ट में पेंडिंग है उन्हें बंद किया जाता है.
पत्नी को मिली बच्चों की कस्टडी
कोर्ट ने पत्नी को दोनों बेटों की कस्टडी दी है लेकिन पति को बच्चों से मिलने का अधिकार भी दिया है. कोर्ट ने पति को आदेश दिया है कि वह अगले एक साल के भीतर अपनी पत्नी को 5 करोड़ की राशि का भुगतान करेगा. पत्नी को कहा गया है कि अगर उसे 5 करोड़ की राशि चाहिए तो उसे अपने ससुर के नाम पर जो फ्लैट है उसे अगले 2 हफ्तों में खाली करना होगा. पति को यह भी कहा गया है कि वह अब पत्नी या उसके परिवार और वकीलों के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं करेगा.
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