Kisan Andolan थमने की बजाय क्यों हो रहा उग्र; सरकार से 4 दौर की बातचीत फेल, कहां फंसा पेंच?

Farmers Protest Inside Story: किसान आंदोलन उग्र होता जा रहा है। इस बार किसान अपनी मांगें मनवाने के लिए कफन सिर पर बांध कर आए हैं। पुलिस को भी निर्देश हैं कि किसानों को दिल्ली तक न पहुंचने दिया जाए। 8 दिन से किसान शंभु बॉर्डर पर डटे हैं। 4 बार सरकार से वार्ता हो चुकी, लेकिन नतीजा जीरो है, आखिर पेंच कहां फंसा है?

Farmers Protest Shambhu Border Haryana Punjab

File Photo

Farmers Government Meetings Review: लोकसभा चुनाव 2024 सिर पर हैं। चुनाव आयोग किसी भी समय मतदान की तारीखों का ऐलान कर सकता है, लेकिन ऐन मौके पर किसानों ने आंदोलन छेड़ दिया है। वे एक बार फिर दिल्ली में घुसना चाहते हैं, इसके लिए सड़कों पर डटे हैं। अचानक फसलों पर MSP और गारंटी कानून की मांग को लेकर मुखर हो गए हैं। किसानों ने इस बार 12 मांगें केंद्र सरकार के सामने रखी हैं।

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किसानों की सरकार के साथ 8 दिन में 4 दौर की बैठक हो चुकी हैं, लेकिन रिजल्ट जीरो है। सरकार ने MSP को लेकर प्रस्ताव दिया, जिस पर विचार विमर्श के लिए किसानों ने 2 दिन का टाइम लिया, लेकिन पहले ही दिन किसानों ने प्रस्ताव खारिज कर दिया और दिल्ली कूच करने का ऐलान कर दिया। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसानों की 12 सूत्रीय मांगों पर कहां पेंच फंसा हुआ है‌? आइए इसके बारे में जानते हैं…

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MSP देने से सरकार पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, MSP पर सरकार की दलील है कि MSP की कानूनी गारंटी देना बजट में संभव नहीं है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि सच कुछ और है। CRISIL के अनुसार, 2022-23 में ही अगर किसानों को MSP दे दी जाती तो केंद्र सरकार पर 21,000 करोड़ का अतिरिक्त भार आता, जो कुल बजट का मात्र 0.4% है, सरकार यह नहीं देख रही कि MSP की गारंटी देने से कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। ग्रामीण भारत में डिमांड बढ़ेगी और किसानों को अलग-अलग किस्म की फसलें उगाने का भरोसा भी मिलेगा, जो देश की समृद्धि की गारंटी है।

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बैंक लोन माफ किए, MSP देने में समस्या क्या?

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कांग्रेस का कहना है कि जो MSP और गारंटी कानून देने को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा है, वह डॉ. स्वामीनाथन और उनके सपनों का अपमान हैं। MSP की गारंटी देने से भारत का किसान, बजट पर बोझ नहीं, GDP ग्रोथ का सूत्रधार बनेगा। कांग्रेस का कहना है कि जिस देश में 14 लाख करोड़ के बैंक लोन माफ कर दिए गए हों, 1.8 लाख करोड़ कॉर्पोरेट टैक्स में छूट दी गई हो, वहां किसान पर थोड़ा-सा खर्च भी इनकी आंखों को क्यों खटक रहा है? यह समझ से परे है, कहीं ऐसा न हो कि MSP पर गारंटी कानून नहीं बनाना भाजपा के गले की फांस बन जाए।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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