कौन हैं सीमा खन्ना? CEC ज्ञानेश कुमार के बाद जिन पर मचा बवाल, जानें विपक्ष ने क्या लगाए आरोप

देश की सियासत शासन व्यवस्था के एक और केंद्र बिंदु चुनाव आयोग को लेकर गरमाई हुई है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बाद सीमा खन्ना भी विपक्ष के निशाने पर आ गई हैं और उनके इस्तीफे की मांग भी की जा रही है.

Seema Khanna | eci controversy | gyanesh kumar

चुनाव आयोग में वर्किंग सिस्टम बिगाड़ने और रिकॉर्ड में हेरफेर करने पर बवाल छिड़ा है. (Credit-ANI)

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भारतीय चुनाव आयोग (ECI) में छिड़ा विवाद गहराता जा रहा है और अब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के बाद चुनाव आयोग की एक और अधिकारी पर बवाल मच गया है. विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की महिला अधिकारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. यह महिला कोई और नहीं, चुनाव आयोग के इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) डिपार्टमेंट की डायरेक्टर जनरल (DG) सीमा खन्ना हैं, जिन पर वोटर लिस्टों में हेरफेर करने के गंभीर आरोप लगे हैं. चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम के बैक-एंड से छेड़छाड़ करके ERO और ब्लॉक-लेवल अधिकारियों को अंधेरे में रखने के आरोप हैं. स्थानीय स्तर के अधिकारियों (ERO) के अधिकार सीमित करके डेटा एक्सेस सीधे अपने हाथ में लेने के आरोप हैं.

सीमा खन्ना पर क्यों और क्या आरोप लगे?

बता दें की सीमा खन्ना के मामले में विवाद का केंद्र ECINET और ERONET हैं, जो सॉफ्टवेयर सिस्टम हैं और इनका इस्तेमाल चुनाव आयोग वोटर लिस्टों संबंधी काम करने के लिए करता है. चुनाव आयोग ने 22 जनवरी 2026 को ECINET को लॉन्च किया था, जिसके तहत 40 से ज्यादा मोबाइल ऐप्स और वेब पोर्टल्स को एक प्लेटफॉर्म पर लाया गया था. इसका मकसद चुनावी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सही और सटीक जानकारियों के साथ वोटर लिस्ट बनाना है, लेकिन वोटर लिस्टों के काम में सीमा खन्ना की भूमिका पर सवाल उठे हैं. वहीं इस मामले में विवाद तब शुरू हुआ, जब आरोप लगा कि सॉफ्टवेयर के जरिए डेटाबेस का पूरा एक्सेस दिल्ली स्थित ECI के IT विभाग को सौंप दिया गया.

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सीमा खन्ना कौन और ECI में क्या करती हैं?

सीमा खन्ना चुनाव आयोग के इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) डिपार्टमेंट की प्रमुख हैं. वे साल 2025 में नेशनल इन्फर्मेटिक्स सेंटर (NIC) से डेप्युटेशन पर चुनाव आयोग में आई थीं. सीमा ने IIT दिल्ली से इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में डॉक्टरेट (PhD) की है. इन्फॉर्मेशन नेटवर्क, साइबर सिक्योरिटी और IT सिस्टम का 25 साल का अनुभव उन्हें हैं और चुनाव आयोग आने से पहले वे वे केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) में डिप्टी डायरेक्टर जनरल थीं. सीमा खन्ना नेशनल नॉलेज नेटवर्क की डायरेक्टर का पद भी संभाल चुकी हैं. साल 2025 में वे चुनाव आयोग में डेप्युटेशन पर आईं और ECINet सॉफ्टवेयर लॉन्च करके इलेक्शन ऐप्स और डेटाबेस को आपस में कनेक्ट किया.

सीमा खन्ना पर किसने क्या आरोप लगाए हैं?

सीमा खन्ना पर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाए हैं और वोटर लिस्टों के डेटाबेस में हेरफेर की आशंका जताई है. वहीं अभिषेक बनर्जी ने कहा कि 18 फरवरी 2026 को 5 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से मीटिंग की थी और उन्होंने कहा था कि CEC ज्ञानेश कुमार वोटर लिस्ट में हेरफेर करा रहे हैं और इसमें सीमा खन्ना और उनके बैक एंड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हो रहा है. CJP के प्रवक्ता सौरव दास और TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि सीमा खन्ना के डिपार्टमेंट में ही वोटर लिस्टों में लोगों के नाम जोड़ने और हटाने का काम किया जा रहा है. जबकि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार ERO के पास होना चाहिए.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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