चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय चुनाव आयोग ने 25 लाख से ज्यादा अधिकारियों की तैनाती की है. चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था. इनके साथ ही 6 राज्यों की 8 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं. चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए आयोग ने 25 लाख से अधिक चुनाव अधिकारियों की तैनाती की है.

इन चुनावों में कुल 17.4 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. यानी औसतन हर 70 वोटर्स पर एक चुनाव अधिकारी तैनात किया गया है.

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव की तारीखों का ऐलान करते हुए कहा था कि सभी अधिकारियों को पूरी निष्पक्षता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि चुनाव हिंसा और किसी भी प्रकार के प्रलोभन से मुक्त रह सकें और हर मतदाता बिना किसी डर या दबाव के मतदान कर सके.

तैनात किए गए कर्मियों में करीब 15 लाख पोलिंग कर्मी, 8.5 लाख सुरक्षा बल, 40 हजार काउंटिंग स्टाफ, 49 हजार माइक्रो ऑब्जर्वर, 21 हजार सेक्टर अधिकारी और 15 हजार काउंटिंग माइक्रो ऑब्जर्वर शामिल हैं.

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वोटर्स की सुविधा के लिए जमीनी स्तर पर 2.18 लाख से अधिक बीएलओ (BLO) तैनात हैं, जिनसे फोन कॉल के जरिए या ECINet ऐप पर ‘बुक-अ-कॉल’ सुविधा के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है. इसके अलावा, शिकायत या जानकारी के लिए +91 (STD कोड) 1950 हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध है.

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 28A के तहत सभी तैनात अधिकारी चुनाव आयोग के अधीन प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे. चुनाव आयोग ने 832 विधानसभा क्षेत्रों में 1,111 केंद्रीय पर्यवेक्षकों की भी तैनाती की है, जो चुनाव के दौरान आयोग की ‘आंख और कान’ के रूप में काम करेंगे. इनमें 557 सामान्य पर्यवेक्षक, 188 पुलिस पर्यवेक्षक और 366 व्यय पर्यवेक्षक शामिल हैं. अधिकांश पर्यवेक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में पहुंच चुके हैं.

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ये पर्यवेक्षक प्रतिदिन निर्धारित समय पर उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से मुलाकात कर उनकी चुनाव संबंधी शिकायतें सुनेंगे.