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पहलगाम के 'हीरो' आदिल को सलाम! आतंकियों से भिड़ गया था निहत्था; एकनाथ शिंदे ने तोहफे में दिया आलीशान घर

22 अप्रैल 2025 को जब लश्कर के आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू की, तब 28 साल का पोनी ऑपरेटर (घोड़े वाला) आदिल भागने के बजाय ढाल बनकर खड़ा हो गया.

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साल भर पहले कश्मीर की वादियों में जब गोलियां गूंजी थीं, तब एक कश्मीरी युवा ने अपनी जान दांव पर लगाकर निहत्थे पर्यटकों की रक्षा की थी. आज उसी शहीद सैयद आदिल हुसैन शाह की शहादत को पूरा देश नमन कर रहा है. पहलगाम के बैसेरन मैदान में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी से ठीक पहले महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शहीद के परिवार को एक नया ‘पक्का घर’ तोहफे में देकर अपना वादा पूरा किया है.

खाली हाथ आतंकियों से भिड़ गया था आदिल

22 अप्रैल 2025 को जब लश्कर के आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू की, तब 28 साल का पोनी ऑपरेटर (घोड़े वाला) आदिल भागने के बजाय ढाल बनकर खड़ा हो गया. चश्मदीदों के मुताबिक, आदिल ने निहत्थे पर्यटकों को बचाया और निडर होकर आतंकियों से उनकी राइफल छीनने की कोशिश की. इस हमले में मारे गए 26 नागरिकों में आदिल इकलौता स्थानीय व्यक्ति था. उसकी इस बहादुरी ने कश्मीरियत और इंसानियत की मिसाल पेश की थी.

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मिट्टी के घर से ‘पक्के आशियाने’ तक का सफर

हप्तनार गांव में शहीद का परिवार अब तक लकड़ी और मिट्टी के जर्जर घर में रहने को मजबूर था. महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिव सेना की पहल पर करीब 10-12 लाख रुपये की लागत से एक मंजिला आधुनिक घर बनवाया है. उद्घाटन कार्यक्रम में शिंदे खुद वर्चुअली शामिल हुए, जबकि महाराष्ट्र के मंत्रियों ने मौके पर मौजूद रहकर परिवार को चाबियां सौंपीं. यह घर केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है.

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सरकार ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

शहीद आदिल के बलिदान को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने भी परिवार का पूरा ख्याल रखा है. उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने आदिल की पत्नी गुलनाज को मत्स्य विभाग में स्थायी नौकरी दी है, जबकि भाई नजाकत शाह को वक्फ बोर्ड में तैनात किया गया है. परिवार को कुल 20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई. तीसरे भाई नौशाद शाह को 12 लाख रुपये की नई कैब मुहैया कराई गई है ताकि परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके.

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