गोवा में 97 पात्र वोटरों के नाम कटे, चुनाव आयोग की सफाई-सॉफ्टवेयर में नहीं है 'रोलबैक' का विकल्प

गोवा में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) में जांच के बाद योग्य पाए गए 97 नागरिक अंतिम वोटर लिस्ट से बाहर रह गए. चुनाव आयोग ने सफाई दी है कि ECINet सॉफ्टवेयर में फॉर्म 7 के तहत हटाए गए नामों की वापसी का कोई तकनीकी विकल्प नहीं है. गोवा निर्वाचन कार्यालय द्वारा दिल्ली मुख्यालय को 8 बार ईमेल भेजने के बाद भी समय रहते यह तकनीकी अड़चन दूर नहीं की जा सकी.

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Photo Credit: News24

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गोवा में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. जांच में पूरी तरह योग्य पाए जाने के बावजूद 97 नागरिकों के नाम 21 फरवरी को जारी अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो सके. इस पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने अपनी सफाई में कहा है कि उसके ‘ईसीआईनेट’ सॉफ्टवेयर में ‘रोलबैक’ की कोई तकनीकी सुविधा नहीं है. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि जब ईआरओ किसी को अयोग्य पाकर नाम हटाने के लिए ‘फॉर्म 7’ पर कार्रवाई करता है तो सॉफ्टवेयर में उस फैसले को सीधे उलटने का कोई प्रावधान नहीं होता. आयोग के अनुसार, यही तकनीकी अड़चन गोवा के मामले में सामने आई.

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8 बार भेजे गए ईमेल, फिर भी नहीं जुड़ा नाम

SIR प्रक्रिया के दौरान कई मतदाताओं के रिकॉर्ड में माता-पिता या दादा-दादी के ब्योरे के मिलान में ‘लॉजिकल विसंगतियां’ मिली थीं, जिसके बाद उनके नाम काट दिए गए थे. सुप्रीम कोर्ट के 29 जनवरी के आदेश के बाद जब 649 लोगों ने दस्तावेज पेश किए तो निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (EROs) ने 97 मतदाताओं को पूरी तरह पात्र पाया. अधिकारियों ने उन्हें वापस सूची में जोड़ने की सिफारिश की. गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने 11 से 17 फरवरी के बीच दिल्ली स्थित चुनाव आयोग को 8 बार ईमेल भेजकर सॉफ्टवेयर में रोलबैक विकल्प सक्रिय करने की मांग की, लेकिन 21 फरवरी तक तकनीकी समाधान नहीं मिला और वे 97 नागरिक सूची से बाहर ही रह गए.

फॉर्म 6 में संशोधन पर भी आयोग के भीतर मतभेद

यह मामला ऐसे समय में गरमाया है जब फॉर्म 6 में नई घोषणा जोड़ने को लेकर भी विवाद जारी है. नए आवेदकों से पिछली एसआईआर सूची का पारिवारिक ब्योरा मांगा जा रहा है. आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस पर कानूनी आपत्ति जताते हुए असहमति नोट दर्ज कराया था कि नियमों में बदलाव केवल विधि मंत्रालय की अधिसूचना से हो सकता है, प्रशासनिक आदेश से नहीं.

आयोग ने जवाब दिया कि मूल फॉर्म में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि ‘अनुलग्नक डी’ के रूप में इसे जोड़ा गया है. साथ ही आयोग ने डेटा के केंद्रीकरण के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची तैयार करने का कानूनी अधिकार केवल ईआरओ के पास ही सुरक्षित है.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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