Who Are Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) इन दिनों दिल्ली में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामलों पर अंदरूनी मतभेद की खबरों और विपक्ष के हमलों को लेकर सुर्खियों में है. हालांकि निर्वाचन आयोग ने मतभेद की इन सभी खबरों का औपचारिक खंडन किया है, लेकिन एक मीडिया रिपोर्ट के खुलासे के बाद सियासी पारा चढ़ गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित असहमति जताई थी.
क्या है पूरा विवाद?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत जून 2025 में बिहार से हुई थी और बाद में इसे अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन, सूची से नाम हटाने और आईटी सिस्टम के केंद्रीकरण जैसे मामलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं. कुछ कदमों को उन्होंने नियमों के दायरे से बाहर बताया और कहा कि कई फैसलों की पूर्व जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी. इस खुलासे के बाद कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
कौन हैं सुखबीर सिंह संधू?
15 मार्च 2024 को चुनाव आयुक्त का पद संभालने वाले डॉ.सुखबीर सिंह संधू 1988 बैच के उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे हैं. निर्वाचन आयुक्त बनने से पहले वह उत्तराखंड के मुख्य सचिव और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के चेयरमैन रह चुके हैं. उन्होंने केंद्र में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव और लोकपाल के सचिव के रूप में भी सेवा दी है. संधू ने अमृतसर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और गुरु नानक देव विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर डिग्री व कानून की पढ़ाई की है. डॉ.सुखबीर सिंह संधू हॉकी के खिलाड़ी रहे हैं और उत्तराखंड की प्रसिद्ध ‘ब्लैक पीक’ पर करीब 22 हजार फीट की ऊंचाई तक सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुके हैं.
अपने प्रशासनिक करियर में डॉ. संधू ने हरिद्वार, गौतम बुद्ध नगर और ऊधम सिंह नगर जैसे अहम जिलों में बतौर DM सेवाएं दीं. उन्होंने 2007 से 2014 के बीच तीन अलग दलों से जुड़े चार मुख्यमंत्रियों के प्रमुख सचिव के तौर पर काम किया.
कौन हैं विवेक जोशी?
चुनाव आयोग में फैसलों पर आपत्तियों को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी चर्चा में हैं. 1989 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी डॉ. जोशी ने 19 फरवरी 2025 को चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला था. इससे पहले वह हरियाणा के मुख्य सचिव पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे. डॉ. जोशी के पास प्रशासनिक सेवा का लंबा अनुभव है. केंद्र सरकार में वह कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के सचिव, वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव और भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त जैसे शीर्ष पदों पर रह चुके हैं.
इसके अतिरिक्त उन्होंने कपड़ा, महिला एवं बाल विकास और वित्त मंत्रालयों में भी काम किया है. राज्य स्तर पर वह जींद, हिसार और पंचकूला के उपायुक्त तथा अंबाला मंडल के आयुक्त रहे. साथ ही, वह हरियाणा राज्य वित्त आयोग के सदस्य सचिव और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) व भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बोर्ड सदस्य भी रह चुके हैं.
क्यों चर्चा में है चुनाव आयुक्तों की भूमिका?
चुनाव आयोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की तीन सदस्यीय संस्था है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम जोड़ने-हटाने के नियमों और डेटा से जुड़े आईटी तंत्र के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं. तीन सदस्यीय आयोग में दो आयुक्तों के इन सवालों के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है.
किन मामलों पर जताई गईं आपत्तियां?
सामने आई जानकारी के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और संबंधित अधिकारियों को भेजी आपत्तियों में मुख्य रूप से इन बिंदुओं को उठाया:
- फॉर्म-6 में बदलाव: नए वोटरों के पंजीकरण वाले फॉर्म-6 में बिना कानूनी संशोधन के नए नियम जोड़े गए, जिसे संधु ने ‘अवैध और अनधिकृत’ करार दिया.
- वोटर लिस्ट डेटाबेस की सुरक्षा: जोशी ने आशंका जताई कि वोटर लिस्ट के आईटी सिस्टम का ऐसा केंद्रीयकरण हो रहा है, जिससे जमीनी अफसरों की भूमिका कमजोर हो रही है.
- बिना जानकारी के अपील: अदालती आदेशों के जरिए जोड़े गए नामों को दोबारा चुनौती देने की प्रक्रिया में दोनों आयुक्तों को अंधेरे में रखा गया.
हालांकि विवाद सामने आने के बाद आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि निर्वाचन आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से ही लिए जाते हैं.