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RudraM-II: DRDO ने किया 'रुद्रएम-II' मिसाइल का सफल परीक्षण, ताकत जान कांप जाएगा दुश्मन!

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान-परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, आईएएफ, डीपीएसयू, डीसीपीपी और उद्योग के प्रयासों की सराहना की है. उन्होंने कहा कि परीक्षणों ने स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता को प्रदर्शित किया है, जो उन्नत हथियार प्रणालियों में आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है.

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ और भारतीय वायु सेना ने एक साथ मिलकर हवा से सतह पर मार करने वाली रुद्रएम-II मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है. परीक्षण सभी उप-प्रणालियों की क्षमता वाले स्वदेशी तरीके से किया गया है. मिसाइल को दागने के बाद पिन-पॉइंट सटीकता के साथ लक्ष्य की ओर भेजा गया.

सक्सेस टेस्टिंग की खासियत

  • यह एक स्वदेशी रूप से विकसित, ठोस ईंधन से चलने वाली एयर-टू-सरफेस मिसाइल है.
  • मिसाइल को अत्यधिक चरम स्थितियों में दागा गया, जिसने अपने क्रिटिकल ट्रैजेक्टरी को पूरा करते हुए पिन-पॉइंट सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदा गया है.
  • इसमें अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों और मार्गदर्शन एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया गया है, जो दुश्मन के अलग अलग तरीके से बनाये गए अड्डो को नष्ट करने में सक्षम है.
  • मिसाइल के प्रदर्शन को एकीकृत परीक्षण रेंज चांदीपुर द्वारा तैनात रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और टेलीमेट्री स्टेशनों के माध्यम से ट्रैक और सत्यापित किया गया है.

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डीआरडीओ के मुताबिक रुद्रम-II को रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान और आईटीआर जैसी अन्य सहयोगी प्रयोगशालाओं के सहयोग से नोडल डीआरडीओ प्रयोगशाला के रूप में अनुसंधान केंद्र इमारत, हैदराबाद द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है. डेवलपमेंट कम प्रोडक्शन पार्टनर्स (डीसीपीपी) के साथ-साथ, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, रीजनल सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस, मिसाइल सिस्टम क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसी और कई अन्य उद्योगों जैसी एजेंसियों ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल उड़ान-परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, आईएएफ, डीपीएसयू, डीसीपीपी और उद्योग के प्रयासों की सराहना की है. उन्होंने कहा कि परीक्षणों ने स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता को प्रदर्शित किया है, जो उन्नत हथियार प्रणालियों में आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है.

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