पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की आदियाला जेल में कैद हैं और जनवरी 2026 से अपनी हेल्थ को लेकर सुर्खियों में हैं. क्योंकि उनके परिजनों ने इमरान खान के बीमार होने और सेना-सरकार पर उनका इलाज नहीं कराने के आरोप लगाए हैं. इस वजह से उनकी हालत बेहद खराब है और उनकी आंखों की रोशनी भी काफी खराब हो गई है. पाकिस्तान की सेना और सरकार उन्हें उनके परिजनों से भी नहीं मिलने देती. विरोध प्रदर्शनों के बाद इमरान खान की बहन को मुलाकात करने की दी गई, लेकिन इलाज नहीं कराया गया.
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कराया गया थी भर्ती
बीते दिनों इमरान खान की जेल के अंदर मौत होने की खबर आई थी, जो अफवाह निकली, लेकिन इस अफवाह ने उनकी बहनों की चिंता बढ़ा दी. परिणामस्वरूप इस बार मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा तो इमरान खान का इलाज कराने का आदेश सेना-सरकार को दिया गया. आदेशानुसार इमरान खान को बीती रात आदियाला जेल से शिफा अस्पताल लाया गया और 2 घंटे में ही चेकअप कराकर वापस जेल पहुंचा दिया गया. इमरान खान के परिजनों ने सेना-सरकार पर जेल में बंद कैदियों की तरह सभी अधिकार नहीं दिए जाने का आरोप भी लगाया गया.
इमरान खान के इलाज का खर्च कौन उठाएगा?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रमुख इमरान खान की दाईं आंख की रोशनी घट गई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें जेल से अस्पताल ले जाया गया. कैदी होने के नाते इमरान खान का इलाल कराने की जिम्मेदारी जेल प्रशासन और सरकार की है. वहीं जेल में स्वास्थ्य सुविधाएं पाना कैदी का मौलिक और कानूनी अधिकार है. सजायाफ्ता ने चाहे सामान्य अपराध किया हो या हाई प्रोफाइल कैदी हो, संवैधानिक पद पर रह चुका हो प्राथमिक स्वास्थ्य सुरक्षा पाने का उसे पूरा कानूनी अधिकार है. पाकिस्तान की जेलों में कैदियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए डिस्पेंसरी या छोटा अस्पताल होता है.
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फुल-टाइम सरकारी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ होते हैं. सामान्य बीमारी होने पर फर्स्ट एड और रूटीन चेकअप जेल परिसर के अंदर ही कराया जाता है. डिस्पेंसरियों में जरूरी दवाइयां और मेडिकल इंस्ट्रूमेंट सरकार ही उपलब्ध कराती है. वहीं गंभीर रूप से बीमार होने पर अगर कैदी को जेल से बाहर ले जाने की जरूरत पड़ती है तो जेल के अस्पताल में तैनात डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड बनाया जाता है. जो कैदी की स्थिति को देखते हुए जेल से बाहर अस्पताल में भर्ती करने की सिफारिश करता है. जेल से बाहर अस्पताल में भर्ती कराते समय होने वाला परिवहन, सुरक्षा और इलाज का सरकार खर्च भी जेल प्रशासन या सरकार उठाती है.
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कैदी के इलाज को लेकर परिवार के लिए नियम
नियमों के अनुसार, जेल में बंद कैदी के परिजन अपनी मर्जी से किसी प्राइवेट अस्पताल में या पर्सनल डॉक्टर से उसका इलाज नहीं करा सकते. विशेष परिस्थितियों में कैदी के परिजन या वकील हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके कैदी के लिए प्राइवेट डॉक्टरों की सलाह या कैदी को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराने की अनुमति मांग सकते हैं. कोर्ट परिवार की मांग पर संज्ञान ले तो वह निष्पक्ष जांच के लिए गवर्नमेंट मेडिकल बोर्ड गठित कर सकती है. अदालत के आदेश पर कैदी के परिजनों के द्वारा रिकमेंड किए गए डॉक्टर को भी बोर्ड में शामिल किया जा सकता है.
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