Cyclone Helene Harm Earth Badly: 26 सितंबर, 2024 को फ्लोरिडा में जिस चक्रवाती तूफान हेलेन ने तबाही मचाई थी, उसने धरती को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। यह दावा अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने एक तस्वीर जारी करके किया है। दावा किया गया है कि जब समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठीं और वे धरती से टकराई तो धरती की ऊपरी सतह क्रैक हुई। नासा के AWE ने वायुमंडल में कंपन रिकॉर्ड किया, जो तूफान हेलेन ने जमीन से लगभग 55 मील ऊपर पैदा किया था।
वायुमंडलीय तरंगें समुद्र तूफान, बवंडरों और सुनामी के कारण भी पैदा हो सकती हैं, लेकिन तूफान हेलेन इतना शक्तिशाली था कि इसने ही पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में बहुत बड़ी लहरें पैदा कर दीं, जिन्हें वायुमंडलीय गुरुत्वाकर्षण तरंगें कहा जाता है। नासा के अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर इस तरंगों पर रिसर्च की गई, जो ज़मीन से लगभग 90 किलोमीटर ऊपर रिकॉर्ड हुईं।
नासा की ओर से जारी की गई तस्वीर।
3 रंग की लहरें वैज्ञानिकों ने देखीं
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी अंतरिक्ष के मौसम पर धरती के मौसम के प्रभाव को दर्शाती है। AWE उपकरण इन वायुमंडलीय तरंगों का पता एयरग्लो को मापकर लगाता है, जो मेसोस्फीयर में गैसों द्वारा पैदा की जाने वाली एक मंद रोशनी है। यह तरंगें उपग्रहों, उनकी कार्यप्रणाली, संचार संकेतों और अन्य तरंगों को बाधित कर सकती हैं। इससे धरती पर संचार व्यवस्था ठप हो सकती है।
लोगान में यूटा स्टेट यूनिवर्सिटी में AWE के रिसर्चर लुडजर शेर्लिएस कहतेह है कि फैलते पानी के छल्लों की तरह हेलेन से उठने वाली गोलाकार लहरें फ्लोरिडा के उत्तर-पश्चिमी तट से पश्चिम की ओर उठती हुई दिखाई दीं और फिर वे जोरदार तरीके से धरती से टकराईं। इस टकराव से जो वायुमंडलीय तरंगें बनी, वे लाल-पीले और नीले रंग की थी, जिन्हें नासा के वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड किया। तूफान हेलेन श्रेणी 4 का तूफान था, जिसकी गति 225 किमी/घंटा तक थी, जब यह फ्लोरिडा पहुंचा।
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कई कारणों से पैदा होती हैं तरंगें
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तूफान के कारण 230 से अधिक लोग मारे गए, जबकि अरबों डॉलर की संपत्ति का नुकसान हुआ। तूफान हेलेन के कुछ सप्ताह बाद, अमेरिकी राज्य को मिल्टन नामक एक और शक्तिशाली तूफान का सामना करना पड़ा। वायुमंडलीय गुरुत्व तरंगें वायुमंडल में पैदा होने वाली लहरें हैं, जो हवा में गड़बड़ी के कारण पैदा होती हैं। यह वैसा ही है, जैसा तब होता है, जब आप किसी शांत तालाब में पत्थर गिराते हैं तो पानी में कंपन पैदा होता है।
जिस तरह पानी में लहरें बनती हैं, उसी तरह वायुमंडल में भी लहरें बनती हैं और वे तब बनती हैं, जब पहाड़ियों या पहाड़ों द्वारा हवा को वायुमंडल में ऊपर की ओर धकेला जाता है। गुरुत्वाकर्षण के कारण हवा वापस नीचे गिरती है और धरती का दोलन करना शुरू कर देती हैं, जिससे एक लहर पैदा होता है। यह तरंगें ब्रह्मांडीय घटनाओं, जैसे ब्लैक होल, एस्ट्रॉयड और न्यूट्रॉन तारों के टकराव के परिणामस्वरूप भी पैदा होती हैं।
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