Wednesday, July 8, 2020

EWS वर्ग के छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए लैपटॉप/टैब्लेट्स और हाई स्पीड इंटरनेट दिए जाने की मांग

कोरोना वायरस (Coronavirus) यानी कोविड 19 (Covid 19) महामारी के चलते लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान देशभर के स्कूलों में आजकल ऑनलाइन क्लास के सहारे पढ़ाई हो रही है। विडियो एप्प के माध्यम से बच्चों की लाइव क्लास हो रही है। बच्चे यूट्यूब पर उपलब्ध एजुकेशनल विडियोज के माध्यम से भी स्टडी कर रहे हैं।

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) यानी कोविड 19 (Covid 19) महामारी के चलते लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान देशभर के स्कूलों में आजकल ऑनलाइन क्लास के सहारे पढ़ाई हो रही है। विडियो एप्प के माध्यम से बच्चों की लाइव क्लास हो रही है। बच्चे यूट्यूब पर उपलब्ध एजुकेशनल विडियोज के माध्यम से भी स्टडी कर रहे हैं। लेकिन समाज का एक ऐसा वर्ग भी है जिनके बच्चों को यह सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जस्टिस फ़ॉर ऑल नामक एक एनजीओ ने ऐसे ही बच्चों के लिए दिल्ली हाइकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। याचिका में ऑनलाइन क्लास का लाभ उठाने में आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग और कमज़ोर वर्ग (डीजी) को जो मुश्किलें पेश आ रही हैं, उन्हें दूर करने के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांंग अदालत से की गई है।

याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि वह दिल्ली सरकार को आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के छात्रों को ऑनलाइन क्लास का लाभ उठाने में मदद करने के लिए उन्हें लैपटॉप/टैबलेट्स और हाई स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराने का निर्देश दे। जस्टिस फ़ॉर ऑल एनजीओ की याचिका में शिक्षा का अधिकार की धारा 3(2) का उल्लेख करते हुए याचिका में कहा गया है – “सरकार का यह कर्तव्य है कि वे आर्थिक रूप से कमज़ोर और समाज के कमज़ोर वर्ग़ों के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने में किसी भी तरह की बाधा नहीं आने दे। जिन बच्चों के पास सारे उपकरण हैं वे तो शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं पर जिनके पास ये साधन नहीं हैं वे ख़ाली बैठे हैं क्योंकि इनके नहीं होने की वजह से वे शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह रहे हैं।”

याचिकाकर्ता का कहना है कि सीबीएसई और एमएचआरडी ने जो सर्कुलर जारी किया है उसमें ऑनलाइन शिक्षा की प्रशंसा की गई है पर इस बात को भुला दिया गया है कि ऐसे भी बच्चे हैं जिनका परिवार उन्हें इसके लिए ज़रूरी उपकरण नहीं दे सकता कि वे ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर सकें। याचिका में कहा गया है कि आरटीई कानून के अंतर्गत सरकार का यह दायित्व है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कमज़ोर वर्ग के छात्रों के साथ कोई भेदभाव नहीं हो जिससे उनके लिए प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करना मुश्किल हो जाए।

इसमें यह भी कहा गया है कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह इस वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में मददकारी उचित उपकरण और बुनियादी सुविधाएँ उपलध कराए। हालाँकि आरटीई नियमों में लैपटॉप और टैबलेट देने की बात नहीं है पर याचिकाकर्ता का कहना है कि COVID-19 के कारण जो विशेष परिस्थिति बनी है उसको देखते हुए इस पर विचार करना चाहिए।

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