मंगलवार को धरने पर बैठे कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसके बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस तरह किसी सांसद को घसीटकर हिरासत में लेना या गिरफ्तार करना सही है. क्या ये संसद के विशेषाधिकार का उल्लंघन है या हिरासत में लेने से पहले स्पीकर की मंज़ूरी लेनी ज़रूरी है. सुप्रीम कोर्ट के वकील और लॉ एक्सपर्ट आर के सिंह ने इन सवालों के जवाब दिए.

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क्या है सच?

आर के सिंह के मुताबिक, अगर पुलिस को लगता है कि अगर कानून-व्यवस्था के हालात बेकाबू हो रहे हैं तो वो सांसदों समेत किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकती है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास का इलाका संवेदनशील माना जाता है. अगर कोई भी इस इलाके में विरोध प्रदर्शन में शामिल होता है या उसका नेतृत्व करता है तो पुलिस उसके खिलाफ एक्शन ले सकती है. आर के सिंह ने कहा कि भारतीय कानून के तहत, अगर किसी सांसद को गंभीर अपराध (हत्या, भ्रष्टाचार या दंगे) के मामले में पुलिस हिरासत में लेती है, तो उसके लिए स्पीकर से मंज़ूरी लेना ज़रूरी नहीं होता.

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किन मामलों में सूचित करना ज़रूरी

आर के सिंह ने कहा कि अगर किसी सांसद को गिरफ्तार या हिरासत में लिया जाता है, तो पुलिस को बिना किसी देरी के लोकसभा स्पीकर को सूचित करना अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि सांसदों को गिरफ्तारी से सुरक्षा सिर्फ दीवानी मामलों में ही दी जाती है. ये सुरक्षा संसद सत्र शुरू होने से 40 दिन पहले, सत्र के दौरान और खत्म होने के 40 दिन बाद तक लागू रहती है. लेकिन ये छूट क्रिमिनल केस पर लागू नहीं होती.

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संसद परिसर में अलग हैं नियम

आर पी सिंह ने बताया कि संसद परिसर में अगर कोई हिरासत या गिफ्तार किया जाता है, तो उसके नियम बिल्कुल अलग है. उन्होंने कहा कि संसद में लोकसभा स्पीकर की मंज़ूरी के बिना ऐसा करना मुमकिन नहीं है. कानून एक्सपर्ट ने कहा कि सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि बिना स्पीकर की सहमति के किसी सांसद को परिसर के अंदर कानूनी समन या नोटिस भी नहीं दिया जा सकता, लेकिन ये नियम संसद की चार दीवारों तक ही लागू होते हैं. उन्होंने कहा कि आज पीएम आवास के बाहर से जिन सांसदों को हिरासत में लिया गया, उसके लिए स्पीकर की मंज़ूरी जरूरी नहीं थी.

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