कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आज तिरंगा मार्च से देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने कहा है कि वे रानी झांसी रोड पर मोतिया खान एरिया में रह रहे हैं, लेकिन पुलिस और खुफिया एजेंसी के लोग सादी वर्दी में मेरे घर की निगरानी कर रहे हैं. मुझ पर नजर रख रहे हैं और आस-पास लोगों से मेरे बारे में पूछताछ कर रहे हैं. बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों में मेरा पीछा कर रहे हैं. इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के लोग हैं, जो साये की तरह मेरे साथ-साथ और मेरे आस-पास घूम रहे हैं. ऐसे बर्ताव किया जा रहा है, जैसे कोई आतंकी या अपराधी हूं.
तिरंगा मार्च से पहले डिटेन होने की आशंका जताई
अभिजीत दीपके ने झंडेवालान में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली पुलिस की ओर से उन्हें तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिए जाने की आशंका जताई है. दीपके का कहना है कि अब देश में तिरंगा फहराना भी गुनाह हो गया है, लेकिन वे सेंट्रल पार्क जाएंगे और तिरंगा फहराएंगे. अगर यह अपराध है और पुलिस वाले इसे अपराध मानते हैं तो वे सबसे बड़े देशद्रोही हैं. अगर तिरंगा फहराने के लिए जेल जाना पड़ेगा तो मुझे मंजूर है. देश में तिरंगा लहराने और चुनावी जवाबदेही की मांग करने वालों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है और गलत करने वालों का बचाव किया जा रहा है.
अभिजीत दीपके ने पार्क बंद करने पर कसा तंज
अभिजीत दीपके ने कहा कि 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने दिल्ली में परिवहन और इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाईं. अब 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पार्क को ही बंद कर दिया है. अशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने कहा कि पार्टी आशुतोष और सौरव की गिरफ्तारी को अदालत में चुनौती देगी. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके इस्तीफा देने तक और और निष्पक्ष चुनाव आयोग बनाने की मांग के लिए अभियान जारी रहेगा.
अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री को संबोधित किया
बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री मोदी को भी संबोधित किया और कहा कि CJP अपनी मांगें मनवाकर रहेगी और किसी हालत में पीछे नहीं हटेगी. CJP की मांग केंद्र सरकार को बदलने की नहीं है. बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग है. क्योंकि ज्ञानेश कुमार अपने साथी चुनाव आयुक्तों की बात नहीं सुन रहे हैं और न ही उनकी सहमति से कोई फैसला ले रहे हैं तो क्या मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग करना क्राइम है? देश में आपातकाल जैसे हालात बना दिए गए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी एमरजेंसी घोषित नहीं कर सकते, उनकी छवि खराब हो जाएगी.