महिला आरक्षण बिल को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है. सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है. जिसमें केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करा सकती है. केंद्र सरकार ने अभी तक मानसून सत्र 2026 का सत्रावसान नहीं किया है, जबकि संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन 13 अगस्त को था. इसलिए केंद्र सरकार विशेष सत्र में मानसून सत्र का औपचारिक समापन कर सकती है. सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार के पास दोनों बिल पारित कराने के लिए जरूरी वोटर संख्या है. फिर भी इस छोटे विपक्षी दलों से संपर्क साधा गया है और बातचीत पूरी होते ही संसद का विशेष सत्र की तारीखों की घोषणा की जा सकती है.
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विपक्षी दलों से संपर्क साध रही केंद्र सरकार
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार न सिर्फ सहयोगी दलों बल्कि विपक्ष के छोटे दलों से भी बातचीत कर रही है. परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास सरकार कर रही है. 17 अप्रैल को बजट सत्र में मोदी सरकार को झटका लगा, जब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने वाला बिल निचले सदन में पारित नहीं हुआ. केंद्र सरकार तमिलनाडु चुनाव के बाद विधेयकों के समर्थन के लिए कांग्रेस से अलग हुए द्रविड़ दल और DMK से बातचीत कर रही है, क्योंकि इन दोनों के 22 सांसद काम आ सकते हैं. DMK परिसीमन बिल के मुखर विरोधियों में से एक है, लेकिन पार्टी अब INDIA ब्लॉक से अलग हो गई है तो समर्थन NDA को मिल सकता है.
BRICS फोरम के अनुसार तय होंगी तारीखें
सूत्रों के अनुसार, आगामी 26-27 अक्टूबर को संसद भवन में 12वां BRICS संसदीय फोरम आयोजित होगा, जिसको ध्यान में रखते हुए संसद के विशेष सत्र की तारीखें तय की जा सकती हैं. अगर विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया जाता है तो सांसदों को करीब एक सप्ताह पहले नोटिस जारी किया जा सकता है. वहीं विशेष सत्र 20 अक्टूबर के बाद और 25 अक्टूबर से पहले बुलाया जा सकता है.
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बिल पास कराने के लिए वोटों का समीकरण
बता दें कि केंद्र सरकार को संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की जरूरत होगी, जो दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत होगा. वर्तमान में NDA के पास संसद के दोनों सदनों में बहुमत तो है, लेकिन दो-तिहाई यानी 360 वोट नहीं है. लेकिन सत्र के बाद संसद में सरकार की स्थिति में सुधार हुआ है. तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद और शिवसेना (UBT) के 6 सांसद NDA में शामिल हो गए हैं. केंद्र सरकार को अन्य दलों जैसे NCP-SP के 8 सांसदों का समर्थन की उम्मीद है लेकिन इसके लिए शर्त रखी गई है.
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