केंद्रीय कर्मचारियों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर सरकार की ओर से एक अहम जानकारी सामने आई है. केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि पति और पत्नी दोनों ही केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं, एक ही स्थान पर तैनात हैं और उनमें से किसी एक को सरकारी आवास आवंटित किया गया है, तो उन्हें हाउस रेंट अलाउंस (HRA) नहीं दिया जाएगा. सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि इस मौजूदा नीति में बदलाव या पुनर्विचार का कोई नया प्रस्ताव नहीं है.
राज्यसभा में उठा था सवाल
राज्यसभा में सांसद सुमित्रा बाल्मिक ने इस मुद्दे पर सरकार से लिखित सवाल पूछा था. उन्होंने पूछा था कि जब पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं और सरकार द्वारा आवंटित एक ही आवास में साथ रहते हैं, तो ऐसी स्थिति में HRA को लेकर क्या नियम हैं? इसके अलावा उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि क्या कर्मचारियों या सर्विस एसोसिएशन की तरफ से इस नीति पर पुनर्विचार की मांग की गई है और क्या सरकार इसे अधिक न्यायसंगत बनाने के लिए किसी समीक्षा का प्रस्ताव रखती है.
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वित्त राज्य मंत्री ने दिया जवाब
इन सवालों का लिखित जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने HRA दिए जाने के मूल उद्देश्य को स्पष्ट किया. उन्होंने बताया कि हाउस रेंट अलाउंस उन केंद्रीय कर्मचारियों को प्रदान किया जाता है जिन्हें सरकार की ओर से आवास आवंटित नहीं होता है, ताकि वे अपनी जेब से किराए पर मकान लेने का खर्च वहन कर सकें.
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मंत्री ने स्पष्ट किया कि जब पति-पत्नी दोनों केंद्रीय कर्मचारी होकर एक ही स्टेशन पर तैनात होते हैं और उनमें से किसी एक के नाम पर सरकारी मकान आवंटित होता है, तो ऐसी स्थिति में आवास की जरूरत पहले ही पूरी हो जाती है. इसलिए HRA देने का प्रावधान लागू नहीं होता. सरकार ने इस नीति को पूरी तरह स्पष्ट और तर्कसंगत बताते हुए किसी भी प्रकार के समीक्षा प्रस्ताव से इनकार किया है.
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