हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों से जुड़े विवाद के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. BCI के सह-अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट वाईआर सदाशिव रेड्डी ने वित्तीय अनियमितताओं सहित कई गंभीर आरोपों को लेकर अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा से तत्काल इस्तीफे की मांग की है. रेड्डी ने एक पत्र लिखकर अध्यक्ष को 15 दिनों के भीतर पद छोड़ने को कहा है. सह-अध्यक्ष सदाशिव रेड्डी ने अध्यक्ष को लिखे पत्र में आठ बिंदुओं के तहत कई आरोप लगाए हैं. रेड्डी ने कहा कि उन्होंने यह पत्र ‘काफी पीड़ा’ के साथ लिखा है, क्योंकि इस मुद्दे पर उनकी चुप्पी देश के वकीलों द्वारा उन पर जताए गए भरोसे की अनदेखी होगी.
BCI चेयरमैन ने लॉ छात्रों से क्यों मांगी माफी? स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लिखे पत्र में जताया खेद
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, रेड्डी का कहना है कि मनन कुमार मिश्रा इस वैधानिक संस्था को सार्वजनिक ट्रस्ट के बजाय निजी संपत्ति की तरह चला रहे हैं. एक आरोप यह भी है कि पुराने ट्रस्ट को जानबूझकर निष्क्रिय कर सितंबर 2020 में ‘BCI ट्रस्ट पर्ल फर्स्ट’ नाम से नया ट्रस्ट बना दिया गया. इसके बाद BCI फंड से करीब 150 करोड़ रुपये नए ट्रस्ट में भेजने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर सदस्यों के विरोध को नजरअंदाज कर दिया गया.
रेड्डी ने आरोप लगाया कि लॉ कॉलेजों को BCI की मंजूरी और नवीनीकरण के लिए बड़ी रकम देने पर मजबूर किया जा रहा है. परिषद और उससे जुड़े संस्थानों में नियुक्तियों में जमकर पक्षपात का आरोप है. पत्र के मुताबिक, कई कर्मचारी और अधिकारी अध्यक्ष के रिश्तेदार या पारिवारिक सदस्य हैं और ये नियुक्तियां बिना किसी विज्ञापन या मेरिट लिस्ट के की गईं.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर मनन कुमार मिश्रा को BCI अध्यक्ष पद से तत्काल हटाने और नए चुनाव कराने की मांग की गई है.
सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती
यह पत्र ऐसे वक्त पर सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट में मनन कुमार मिश्रा के लगातार पद पर बने रहने को लेकर एक याचिका दायर की गई है. वकील योगमाया एमजी द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि BCI नियमों के तहत अध्यक्ष का कार्यकाल दो साल का होता है, जबकि अप्रैल 2025 के गजट नोटिफिकेशन के जरिए इसे बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया था..
याचिका में शीर्ष अदालत से गुहार लगाई गई है कि मनन कुमार मिश्रा को पद से हटाकर BCI के रोजमर्रा के कामकाज के लिए एक स्वतंत्र प्रशासनिक समिति नियुक्त की जाए. इसके साथ ही BCI के वित्तीय मामलों, नियुक्तियों, BCI ट्रस्ट और ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन के कामकाज की निष्पक्ष जांच कराई जाए.
अब बेंगलुरु के NLSIU में CJI सूर्यकांत और BCI अध्यक्ष को दीक्षांत समारोह में बुलाने पर आपत्ति
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