गृहमंत्री की पहल पर 50 साल पुराना विवाद खत्म, असम और अरुणाचल प्रदेश को मिली बराबर जमीन, शाह ने बताया ऐतिहासिक कदम
Edited By Bhola Sharma

Assam and Arunachal Pradesh governments agreement
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Assam and Arunachal Pradesh governments agreement
Assam-Arunachal Pradesh Border Disputes: बीते 50 सालों से असम और अरुणाचल प्रदेश सरकार के बीच चल रही टकराहट गुरुवार को खत्म हो गई। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अरुणाचल प्रदेश में उनके समकक्ष प्रेमा खंडू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एमओयू पर साइन किए। इसके बाद 123 गांवों को लेकर चल रही लड़ाई खत्म हो गई है। दोनों मुख्यमंत्रियों ने आज के दिन को ऐतिहासिक बताया है।
यह समझौता दिल्ली में हुआ है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 1972 से आज तक इस सीमा विवाद को सुलझाया नहीं जा सका था। लोकल कमिशन की रिपोर्ट 1972 से अब तक अलग-अलग सरकारों में अदालतों में विवाद से ग्रस्त रही। उस रिपोर्ट को दोनों राज्य की सरकारों ने स्वीकार कर लगभग 800 किलोमीटर की असम अरुणाचल सीमा विवाद आज समाप्त कर लिया है।
#WATCH | Assam and Arunachal Pradesh governments sign an agreement for the settlement of an inter-state boundary dispute in the presence of Union Home Minister Amit Shah in Delhi pic.twitter.com/Fkg0RNw7Bx
— ANI (@ANI) April 20, 2023
बता दें कि हिमंत बिस्वा सरमा और प्रेमा खांडू पिछले साल 15 जुलाई को नामसाई घोषणा पर हस्ताक्षर करने के साथ दोनों राज्य के बीच सीमा विवाद को हल करने के लिए प्रयास कर रहे थे। दोनों मुख्यमंत्रियों ने जल्द विवाद खत्म करने का संकल्प भी लिया था।
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच 1972 से सीमा विवाद था। आज हमने सभी विवादों के बातचीत कर सुलझा लिया है। गृह मंत्री के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री के आशीर्वाद से ये विवाद सुलझ गया है, ये एक मील का पत्थर साबित होगा।
#WATCH असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच 1972 से सीमा विवाद था। आज हमने सभी विवादों के बातचीत कर सुलझा लिया है। गृह मंत्री के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री के आशीर्वाद से ये विवाद सुलझ गया है, ये एक मील का पत्थर साबित होगा: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, दिल्ली pic.twitter.com/2no3XDB8k3
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 20, 2023
बता दें कि अरुणाचल प्रदेश को 1972 में एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। प्रदेश सरकार का आरोप था कि तमाम पहाड़ी इलाके एकतरफा फैसले के लिए असम में ट्रांसफर कर दिए गए थे। विवाद 132 गांवों को लेकर था। 1987 में जब अरुणाचल प्रदेश को राज्य का दर्जा मिला तो एक त्रिपक्षीय समिति नियुक्त की गई। जिसने सिफारिश की कि कुछ क्षेत्रों को असम से अरुणाचल प्रदेश में स्थानांतरित किया जाए। असम ने इसका विरोध किया और मामला लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में रहा।
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