लोकसभा में कल हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया. जिसके बाद आज 30 जुलाई को केंद्र सरकार राज्यसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पेश करेगी. बता दें कि लोकसभा से पारित हो चुके इस बिल पर अब संसद के उच्च सदन में चर्चा होगी. देशभर में छात्रों के भारी विरोध के बाद सरकार ये बिल लेकर आई है और इस संशोधन विधेयक पर आज सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

बुधवार (29 जुलाई) को लोकसभा में जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस विधेयक पर अपनी बात रखी तो इस दौरान सदन में जमकर हंगामा हुआ. राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली थी. इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी बीच में स्थिति को संभालना पड़ा. राहुल गांधी के कड़े रुख के बाद भी केंद्र सरकार ने इस बिल को लोकसभा से पारित करा लिया. वहीं, अब सवाल ये है कि लोकसभा से पास होने के बाद क्या राज्यसभा में ये बिल सरकार आसानी से पास करा लेगी या नहीं.

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क्या राज्यसभा में आसानी से पास हो जाएगा एंटी पेपर लीक बिल?

राज्यसभा में किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत हासिल करना होता है. राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 245 निर्धारित है, लेकिन अभी सदन में 242 सदस्य हैं. मौजूदा स्थिति में यदि किसी विधेयक को विशेष बहुमत से पारित कराना हो तो कम से कम 162 सांसदों का समर्थन चाहिए होता है. हालांकि, एंटी-पेपर लीक विधेयक को पारित करने के लिए विशेष बहुमत की नहीं, बल्कि साधारण बहुमत की ही जरूरत है. ऐसे में सरकार को इस बिल को पास कराने के लिए 123 का आंकड़ा चाहिए होगा.

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सरकार के पास है बहुमत से ज्यादा का आंकड़ा

मौजूदा संख्याबल के हिसाब से राज्यसभा में एनडीए के पास करीब 152 सांसदों का समर्थन है, जो साधारण बहुमत के लिए आवश्यक 123 के आंकड़े से बहुत ज्यादा है. ऐसे में सरकार के लिए एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 को उच्च सदन से पारित कराना आसान माना जा रहा है.

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प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाना है. इसके तहत संगठित गिरोहों, संस्थानों और ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है, जो अनुचित तरीकों से परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को और मजबूती मिलेगी.

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एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 में क्या-क्या है नया?

केंद्र सरकार ने बढ़ते पेपर लीक के मामले और संगठित परीक्षा घोटालों पर रोक लगाने के लिए साल 2024 में लागू कानून को और अधिक कठोर बनाने का प्रस्ताव रखा है. एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 में कई नए प्रावधान और बदलाव शामिल किए गए हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में पेश किया है. प्रस्तावित संशोधन के तहत दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पहले की तुलना में और भी ज्यादा सख्त होगी.

  • यदि कोई संगठित गिरोह, संस्था, अधिकारी या अन्य व्यक्ति सुनियोजित तरीके से प्रश्नपत्र लीक कराने या परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे अब अधिकतम 10 साल तक के कारावास का सामना करना पड़ सकता है. पहले ऐसे मामलों में सजा की अधिकतम सीमा 5 साल ही थी.
  • पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर, एजेंसियां या अन्य संस्थानों पर भी कड़ा आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान किया गया है. संशोधन के अनुसार, आरोप साबित होने पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा.
  • ऐसे मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने के लिए हर राज्य में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का प्रस्ताव है. इन अदालतों में मामलों की नियमित सुनवाई होगी, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो.
  • जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए यह भी प्रस्तावित किया गया है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच राज्य पुलिस या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को 60 दिनों के अंदर ही पूरी करनी होगी. इसका उद्देश्य दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना है.