आंध्र प्रदेश जल्द ही भारत का सबसे बड़ा गोल्ड प्रोड्यूसर स्टेट बन सकता है. राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने दावा किया है कि कर्नूल जिले के जोन्नागिरी इलाके में बड़े पैमाने पर सोने के भंडार मिले हैं, जिनके आधार पर आने वाले सालों में राज्य देश में सबसे ज्यादा सोना उत्पादन करने वाला बन सकता है. माइंस विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा के मुताबिक, आंध्र प्रदेश में सोने की खदानों के लिए चार प्रमुख इलाकों की पहचान की गई है. इनमें जोन्नागिरी, रामागिरी, जव्वाकुला और चिगुरुकुंटा-बिसनतम क्षेत्र शामिल हैं. अधिकारियों का अनुमान है कि अकेले जोन्नागिरी क्षेत्र में करीब 50 टन सोने का भंडार मौजूद हो सकता है.
---विज्ञापन---
ये भी पढ़ें: Gold Silver Rate Fall: एक सप्ताह में 5228 रुपये सस्ता हो गया सोना, चांदी का भाव 20092 रुपये घटा
---विज्ञापन---
क्यों खास है जोन्नागिरी?
सबसे खास बात ये है कि जोन्नागिरी में व्यावसायिक स्तर पर सोने का उत्पादन शुरू हो चुका है. लगभग एक दशक पहले यहां करीब 1,500 एकड़ भूमि खनन के लिए दी गई थी. अब तक सिर्फ 500 एकड़ क्षेत्र में ही खोजबीन की गई है, जहां लगभग 13 टन सोने के भंडार का अनुमान लगाया गया है. शेष 1,000 एकड़ क्षेत्र में खोज कार्य पूरा होने के बाद कुल भंडार 50 टन तक पहुंच सकता है. जोन्नागिरी प्रोजेक्ट को भारत की आजादी के बाद की पहली बड़ी निजी स्वर्ण खनन परियोजना माना जा रहा है.
---विज्ञापन---
आंध्र प्रदेश बनेगा गोल्ड हब?
भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है. ऐसे में जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट देश की आयात निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सकता है और खनन क्षेत्र में नए निवेश के अवसर भी पैदा होंगे. ये प्रोजेक्ट करीब 598 हेक्टेयर इलाके में फैला हुआ है और इसमें 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया गया है. परियोजना से हर साल 750 से 1000 किलोग्राम तक सोने का उत्पादन होने की उम्मीद है. राज्य सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू जल्द ही इस परियोजना का शुभारंभ करेंगे. अगर अनुमानित भंडार और उत्पादन लक्ष्य पूरे होते हैं तो आंध्र प्रदेश आने वाले सालों में भारत के स्वर्ण उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है.
---विज्ञापन---
---विज्ञापन---