मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. जब दुनिया की नजरें होर्मुज की खाड़ी पर टिकी हैं और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमले का खतरा मंडरा रहा है. तब भारत ने अपनी रसोई गैस की सप्लाई को बाधित नहीं होने दिया. रविवार की सुबह अमेरिका के टेक्सास से निकला एलपीजी कार्गो जहाज ‘पिक्सिस पायनियर’ (Pyxis Pioneer) सुरक्षित रूप से मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया है. ईरान की धमकियों और समुद्र में फंसे सैकड़ों जहाजों के बीच भारत की यह दमदार कूटनीति दिखाती है कि सरकार ने वक्त रहते वैकल्पिक रास्तों और नए साझेदारों पर काम शुरू कर दिया था. ताकि देश के घरों में चूल्हे ठंडे न पड़ें.
बैक-टू-बैक आएंगे तीन बड़े जहाज
मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचा यह जहाज तो बस शुरुआत है. आने वाले हफ्ते में दो और बड़े एलपीजी जहाज भारत पहुंचने वाले हैं. 25 मार्च को ‘अपोलो ओसियन’ करीब 26,687 टन गैस लेकर आएगा. जो इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम की जरूरतों को पूरा करेगा. इसके ठीक बाद 29 मार्च को एक और जहाज 30,000 टन गैस लेकर एचपीसीएल के लिए पहुंचेगा. यानी इस एक हफ्ते के भीतर अकेले मंगलुरु में 72,700 टन से ज्यादा रसोई गैस की आवक होगी. यह गैस केवल मंगलुरु के लिए नहीं है. बल्कि एचपीसीएल की पाइपलाइन के जरिए इसे बेंगलुरु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों तक भेजा जाएगा. जिससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी.
यह भी पढ़ें: ट्रंप के 48 घंटे के अल्टीमेटम पर ईरान का पलटवार, कहा-गल्फ देशों में अमेरिका के ठिकाने पर मिसाइलें गिराएंगे
होर्मुज संकट और भारत की तैयारी
ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच छिड़ी इस जंग का सबसे बुरा असर होर्मुज की खाड़ी पर पड़ा है. जहाँ से दुनिया का 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है. ईरान ने इस रास्ते को बंद करने और जहाजों पर हमले की चेतावनी दी है. जिसके कारण वैश्विक बाजार में हाहाकार मचा हुआ है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर रास्ता नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा प्लांट राख कर दिए जाएंगे. इस तनावपूर्ण माहौल में जब भारत के भी कई जहाज खाड़ी में फंसे हुए हैं. तब अमेरिका से सीधे गैस मंगाना भारत की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके.
चौथे हफ्ते में पहुंची भीषण जंग
मिडिल ईस्ट में चल रहा यह युद्ध अब अपने चौथे और सबसे घातक सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. अमेरिका और इजराइल ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के तहत ईरान के कई ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं. जवाब में ईरान ने भी यरुशलम और दिमोना जैसे इलाकों पर मिसाइलें दागी हैं. जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ है. अब तक 1,400 से अधिक ईरानी नागरिकों के मारे जाने की खबर है और गाजा से लेकर लाल सागर तक युद्ध की आग फैल चुकी है. ऐसे कठिन समय में भारत का अपनी गैस सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना एक बड़ी राहत की खबर है. फिलहाल भारतीय उपभोक्ताओं को गैस की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा.
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