अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव और युद्ध विराम की लुका-छिपी के बीच भारत ने अपनी सुरक्षा तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है. राजधानी दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बेहद अहम और हाई-लेवल मीटिंग बुलाई, जिसमें देश के सैन्य तंत्र के दिग्गज शामिल हुए. इस बैठक में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सीडीएस जनरल अनिल चौहान, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी और डीआरडीओ प्रमुख समीर वी कामथ मौजूद रहे. न्यूज 24 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक युद्ध के कारण बदलते हालातों के बीच भारतीय डिफेंस सिस्टम की मजबूती को परखना था. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अगर कल को कोई संभावित चुनौती सामने आती है, तो हमारी तैयारी कितनी पुख्ता है.
रक्षा मंत्री ने लिया तैयारियों का जायजा
बैठक में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के 10 महीने बीत जाने के बाद सेना की ताकत में हुए इजाफे का बारीकी से आकलन किया गया. रक्षा मंत्री ने इस दौरान सीमा सुरक्षा, हवाई सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा पर विशेष जोर दिया. सूत्रों का कहना है कि तीनों सेनाओं के साथ-साथ डीआरडीओ की युद्धस्तर पर तैयारियों की समीक्षा की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तकनीक और हथियारों की कमी न खले. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों को ‘फ्री हैंड’ देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि हमें हर पल सतर्क रहना है. रक्षा मंत्री ने दोटूक कहा कि अगर दुश्मन की तरफ से कोई भी हिमाकत या गलत हरकत होती है, तो सेना को बिना देरी किए तुरंत और कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए.
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बिना युद्ध के भी मुस्तैद है देश
यह हाई-लेवल मीटिंग ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर में सुरक्षा का मुद्दा हर बीतते दिन के साथ जटिल होता जा रहा है. हालांकि भारत सीधे तौर पर अमेरिका-ईरान जंग का हिस्सा नहीं है. लेकिन व्यापारिक रास्तों और सामरिक हितों की वजह से वह इस स्थिति का एक महत्वपूर्ण भागीदार बन गया है. खासकर समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे को देखते हुए नेवी की ‘ऑपरेशन रेडीनेस’ पर विशेष चर्चा की गई. भारत की रणनीति साफ है कि वह शांति का पक्षधर है. लेकिन अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा. इस बैठक ने यह संदेश दे दिया है कि भारतीय सेना अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर आक्रामक रुख अपनाने के लिए भी पूरी तरह तैयार है. अब पूरी दुनिया की नजरें भारत के अगले रक्षा कदमों पर टिकी हैं.
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