मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते LNG सप्लाई में संभावित बाधा को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और वितरण को नियंत्रित करने के लिए नया आदेश जारी किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने Natural Gas (Supply Regulation) Order, 2026 लागू किया है, जो राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही प्रभावी हो गया है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि देश में जरूरी क्षेत्रों को गैस की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
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घरेलू गैस और CNG को पहली प्राथमिकता
सरकार के आदेश के मुताबिक घरेलू पाइप्ड गैस (PNG), परिवहन के लिए CNG, LPG उत्पादन और गैस पाइपलाइन संचालन से जुड़े क्षेत्रों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर लगभग 100 प्रतिशत गैस सप्लाई बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।
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उर्वरक उद्योग के लिए 70% गैस
खाद उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए उर्वरक संयंत्रों को पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर लगभग 70 प्रतिशत गैस सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह गैस केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी।
उद्योगों को 80% तक सप्लाई
चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक इकाइयों को गैस की सप्लाई उनके पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर लगभग 80 प्रतिशत तक बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
कमी होने पर इन क्षेत्रों में कटौती संभव
अगर गैस की उपलब्धता कम होती है तो सरकार पेट्रोकेमिकल इकाइयों और कुछ बिजली संयंत्रों की गैस सप्लाई में आंशिक कटौती कर सकती है, ताकि प्राथमिक क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता बनी रहे।
कंपनियों को तुरंत पालन का निर्देश
सरकार ने प्राकृतिक गैस के उत्पादन, आयात, विपणन और परिवहन से जुड़ी सभी कंपनियों को इस आदेश का तुरंत पालन करने का निर्देश दिया है। साथ ही गैस उत्पादन, आयात, स्टॉक और सप्लाई से जुड़ी जानकारी सरकार को उपलब्ध करानी होगी। इस आदेश का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच देश में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और जरूरी क्षेत्रों में गैस की कमी को रोकना है।
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