भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है. वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, वहीं लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट से तीन-तीन यूक्रेनी नागरिक पकड़े गए. इन सभी पर आरोप है कि वो मिजोरम के प्रतिबंधित इलाकों में घुसकर म्यांमार सीमा पार गए और वहां एक्टिव टेररिस्ट ग्रुप्स से संपर्क बनाया. जांच एजेंसी के मुताबिक, ये ग्रुप म्यांमार में सक्रिय विद्रोही संगठनों को ट्रेनिंग देने और हथियार, खासकर ड्रोन तकनीक मुहैया कराने की साजिश में शामिल था. इस मामले को अंतरराष्ट्रीय साजिश और सीमा पार आतंकी नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है.
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कौन है मैथ्यू वैनडाइक?
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को एक ‘मर्सिनरी’ यानी भाड़े का लड़ाका माना जाता है, जो पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय युद्ध क्षेत्रों में एक्टिव रह चुका है. मैथ्यू वैनडाइक का नाम पहली बार 2011 के लीबियाई गृहयुद्ध के दौरान सामने आया. उसने इराक में आतंकी ग्रुप आईएस के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और रूस के खिलाफ युद्ध के दौरान यूक्रेनियन लोगों को ट्रेनिंग भी दी है. उसके बैकग्राउंड और ग्लोबल नेटवर्क को लेकर एजेंसियां गंभीरता से जांच कर रही हैं. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में मौजूद एक स्पेशल एनआईए कोर्ट ने 16 मार्च को सातों को एनआईए की 11 दिनों की हिरासत में भेज दिया है.
क्या था प्लान?
बताया जा रहा है कि ये ग्रुप भारत के नॉर्थ ईस्ट इलाके का इस्तेमाल म्यांमार में चल रहे संघर्ष में हस्तक्षेप के लिए कर रहा था. एजेंसियों को शक है कि इन लोगों का मकसद विद्रोही गुटों को आधुनिक युद्ध तकनीक सिखाना और उन्हें मजबूत करना था. इस पूरे मामले में दिल्ली की एक अदालत ने सभी आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि उनसे पूछताछ कर इस नेटवर्क के बाकी पहलुओं का खुलासा किया जा सके. जांच एजेंसियां ये भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस साजिश के पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क या फंडिंग शामिल है. इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्वोत्तर राज्यों में निगरानी और भी कड़ी कर दी है. आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं, जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम साबित होंगे.
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