फ्लाइट टर्बुलेंस: पायलट नशे में उड़ा रहा था विमान, AAIB की रिपोर्ट के बाद एयर इंडिया ने नौकरी से निकाला
एअर इंडिया ने कहा, ‘हमारे पायलट लागू राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप कड़ा प्रशिक्षण लेते हैं तथा उनकी नियमित दक्षता जांच, चिकित्सा जांच और अन्य नियामक आकलन किए जाते हैं.’
फुकेत से दिल्ली आ रहे एअर इंडिया के एक विमान की 36,000 फुट की ऊंचाई पर तीनों हाइड्रोलिक प्रणालियों में लगभग एक साथ खराबी आने से विमान निर्धारित ऊंचाई से अचानक ऊपर-नीचे हुआ और इसके कारण 24 लोग घायल हो गए. विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है. एएआईबी ने नशीले पदार्थ संबंधी जांच में मुख्य पायलट की रिपोर्ट ‘निगेटिव नहीं’ आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की भी सिफारिश की थी. जिसके बाद अब AAIB की रिपोर्ट के आधार पर एयर इंडिया ने आरोपी पायलट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. वहीं, रिपोर्ट में दूसरे पायलट का टेस्ट निगेटिव आया है.
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Air India Spokesperson: "The Pilot-in-Command of the Phuket-Delhi flight tested positive for a psychoactive substance. In line with Air India's zero-tolerance approach to violation of safety, fitness or regulatory requirements, the pilot's employment has been terminated with… pic.twitter.com/So6bLdLoO5
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की रिपोर्ट सामने आने के बाद एयर इंडिया के प्रवक्ता की तरफ से एक बयान जारी करते हुए बताया गया, फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड की जांच में एक साइकोएक्टिव पदार्थ (नशीला पदार्थ) पाया गया. सुरक्षा, फिटनेस या नियमों के उल्लंघन के मामले में एयर इंडिया की ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति के तहत, पायलट की नौकरी तुरंत प्रभाव से खत्म कर दी गई है.’
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रिपोर्ट में हालांकि ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है कि मुख्य पायलट के नशीले पदार्थ के सेवन का हाइड्रोलिक प्रणालियों में आई खराबी या विमान की ऊंचाई में अचानक आए बदलाव से कोई संबंध था. एएआईबी ने कहा कि दुर्घटना के तकनीकी और अन्य पहलुओं की जांच जारी है. घटना के समय खराब मौसम की कोई सूचना नहीं थी. जांचकर्ता विमान की हाइड्रोलिक प्रणालियों में आई खराबी और अन्य संभावित कारणों की पड़ताल कर रहे हैं.
AAIB ने अपने 10 पन्नों की रिपोर्ट में क्या कहा?
AAIB की 10 पृष्ठ की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, विमान की ‘ग्रीन’, ‘ब्लू’ और ‘येलो’ हाइड्रोलिक प्रणालियों में लगभग एक ही समय पर खराबी आ गई थी लेकिन कुछ ही सेकेंड में ये प्रणालियां फिर काम करने लगीं और विमान ने दिल्ली तक अपनी उड़ान जारी रखी तथा यह सुरक्षित उतर गया. रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना से विमान के भीतर काफी नुकसान हुआ. छत के कई पैनल में दरारें आ गईं, यात्रियों के सामान रखने के लिए ऊपर बने खानों के कुछ हिस्से अपनी जगह से हट गए, रेलिंग टूट गईं तथा चालक दल की एक सीट और आपातकालीन निकास के हैंडल को भी नुकसान पहुंचा.
रिपोर्ट में कहा गया कि उड़ान के बाद की गई जांच में मुख्य पायलट की नशीले पदार्थ संबंधी रिपोर्ट ‘निगेटिव नहीं’ आई. सह-पायलट की जांच रिपोर्ट ‘निगेटिव’ थी यानी उसमें ऐसे किसी पदार्थ के सेवन का संकेत नहीं मिला. एएआईबी ने नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को रोकने के लिए उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की. एएआईबी ने कहा, ‘नशीले पदार्थ के सेवन की पुष्टि गंभीर चिंता का विषय है और एएआईबी डीजीसीए से प्राथमिकता के आधार पर उचित कार्रवाई करने की सिफारिश करता है.’
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फुकेत से दिल्ली की उड़ान संख्या एआई 2379 का संचालन एयरबस ए320-251एन विमान से किया जा रहा था, जिसका पंजीकरण नंबर वीटी-ईएक्सओ था. विमान ने चार अगस्त को भारतीय समयानुसार सुबह सात बजकर 11 मिनट पर फुकेत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी. इसमें तीन शिशुओं समेत 137 यात्री, ‘केबिन क्रू’ के छह सदस्य और दो पायलट सवार थे. विमान भारतीय समयानुसार सुबह नौ बजकर 10 मिनट पर कोलकाता उड़ान सूचना क्षेत्र में पहुंचा, जहां हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) ने उसे 34,000 फुट से 36,000 फुट की ऊंचाई पर जाने का निर्देश दिया.
रिपोर्ट के अनुसार, सुबह नौ बजकर 32 मिनट 43 सेकंड पर 36,000 फुट की ऊंचाई पर उड़ान भरते समय विमान की ‘ग्रीन’ हाइड्रोलिक प्रणाली में दबाव खत्म होने का पता चला. चार सेकेंड बाद उड़ान नियंत्रण प्रणाली ने ‘ब्लू’ और ‘येलो’ प्रणालियों में भी दबाव खत्म होने का संकेत दिया. इसके लगभग तुरंत बाद स्वचालित उड़ान नियंत्रण प्रणाली (ऑटोपायलट) बंद हो गई और लगातार चेतावनी की घंटी बजने लगी. तीन सेकेंड बाद विमान के ‘स्टॉल’ (हवा में बने रहने की क्षमता कम होना) होने की करीब दो सेकेंड तक चेतावनी मिली.
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उस समय सह-पायलट विमान उड़ा रहा था और उसने शुरुआत में स्थिति संभालने की कोशिश की, जिसके बाद मुख्य पायलट ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. इस दौरान विमान निर्धारित ऊंचाई से पहले करीब 372 फुट ऊपर गया और फिर करीब 292 फुट नीचे आ गया. ‘ब्लू’ हाइड्रोलिक प्रणाली कुछ ही सेकेंड में फिर काम करने लगी और इसके बाद ‘येलो’ तथा ‘ग्रीन’ प्रणालियां भी सामान्य हो गईं. इसके बाद उड़ान नियंत्रण से जुड़ी प्रणालियां सामान्य रूप से काम करने लगीं. एएआईबी ने कहा कि घटना के समय विमान 36,000 फुट की ऊंचाई पर उड़ रहा था और सीट बेल्ट बांधने का संकेत बंद था. ऐसे में विमान के अचानक ऊपर-नीचे होने से यात्रियों और ‘केबिन क्रू’ के सदस्यों को चोट लगी.
‘केबिन सुपरवाइजर’ ने पायलटों को यात्रियों और ‘कॉकपिट’ दल के सदस्यों के घायल होने की जानकारी दी. पायलटों ने स्थिति का आकलन करने के बाद निकटतम हवाई अड्डे पर उतरने के बजाय दिल्ली तक उड़ान जारी रखने का फैसला किया. चालक दल ने बाद में दिल्ली के हवाई यातायात नियंत्रण से चिकित्सा सहायता की व्यवस्था करने को कहा, जिसके बाद जरूरी इंतजाम किए गए. विमान भारतीय समयानुसार पूर्वाह्न 11 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे 11L पर सुरक्षित उतरा और पूर्वाह्न 11 बजकर सात मिनट पर निर्धारित पार्किंग स्थल तक पहुंचा.
हवाई अड्डे के चिकित्सा दलों ने 20 यात्रियों और केबिन क्रू के चार सदस्यों समेत 24 लोगों का उपचार किया. मामूली चोटों वाले 20 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि गंभीर रूप से घायल चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. विमान को हुआ नुकसान मुख्य रूप से उसके भीतर के हिस्से तक सीमित था. जांच में विमान के रखरखाव से जुड़े पुराने रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है. फुकेत से उड़ान भरने से पहले रखरखाव कर्मियों ने विमान की जांच की थी और न्यूनतम उपकरण सूची (एमईएल) से संबंधित पहले से दर्ज एक मामले के अलावा कोई नयी खराबी नहीं पायी थी.
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एयरबस ए320 में ‘ग्रीन’, ‘ब्लू’ और ‘येलो’ नाम की तीन स्वतंत्र हाइड्रोलिक प्रणालियां होती हैं, जो उड़ान नियंत्रण और विमान की अन्य प्रमुख प्रणालियों को जरूरी द्रव-दाब उपलब्ध कराती हैं. एएआईबी ने बताया कि संबंधित हाइड्रोलिक उपकरणों को विमान से निकालकर आगे की जांच के लिए भेजा गया है. ‘कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर’ और उड़ान आंकड़ा रिकॉर्डर दोनों बरामद कर लिए गए हैं और उनसे प्राप्त आंकड़ों का आगे विश्लेषण किया जा रहा है. प्रारंभिक रिपोर्ट में उड़ान के बाद दोनों पायलट की चिकित्सा जांच के नतीजों का भी अलग से उल्लेख किया गया है. दिल्ली पहुंचने के बाद दोनों पायलट में अल्कोहल की मात्रा की जांच की गई और उसके नतीजे संतोषजनक रहे. इसके अलावा उनकी नशीले पदार्थ संबंधी जांच भी की गई.
सह-पायलट के नमूने की रिपोर्ट निगेटिव आई, जबकि मुख्य पायलट के शुरुआती नमूने की रिपोर्ट ‘निगेटिव नहीं’ थी. इसके बाद पुष्टि के लिए उसके रक्त का नमूना एक प्रयोगशाला भेजा गया और उसकी रिपोर्ट भी ‘निगेटिव नहीं’ आई. एएआईबी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में यह नहीं बताया है कि किस पदार्थ की मौजूदगी का पता चला या उसका विमान के संचालन पर कोई असर पड़ा था या नहीं. रिपोर्ट के अनुसार, 34 वर्षीय मुख्य पायलट के पास वैध एयरलाइन परिवहन पायलट लाइसेंस है और उसे करीब 5,055 घंटे विमान उड़ाने का अनुभव है. यह पूरा अनुभव एयरबस ए320 विमान उड़ाने का है. वहीं, 32 वर्षीय सह-पायलट के पास वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस है और उसे करीब 1,394 घंटे विमान उड़ाने का अनुभव है. दोनों पायलट ने उड़ान से पहले करीब 22 घंटे आराम किया था.
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एअर इंडिया ने एक बयान में कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है और संचालन, रखरखाव तथा तकनीकी पहलुओं से जुड़े सभी प्रासंगिक रिकॉर्ड उपलब्ध करा रही है. एअर इंडिया ने कहा, ‘हमारे पायलट लागू राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप कड़ा प्रशिक्षण लेते हैं तथा उनकी नियमित दक्षता जांच, चिकित्सा जांच और अन्य नियामक आकलन किए जाते हैं.’ एअर इंडिया ने घटना के बाद अपने सभी पायलटों की मादक पदार्थ संबंधी जांच स्वैच्छिक रूप से शुरू कर दी है.