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मोदी सरकार के 12 साल, किस सेक्टर में हुई सबसे ज्यादा तरक्की? कई गुना हुआ इजाफा

उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना ने रक्षा निर्माण को नया आधार दिया है. इन क्षेत्रों में बड़े निवेश, रोजगार और सप्लाई-चेन नेटवर्क विकसित हो रहे हैं.

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केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल के 12 साल पूरे हो गए हैं और इन 12 सालों में अगर किसी मंत्रालय में सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा तरक्की हुई है तो वह है डिफेंस सेक्टर. 12 सालों में डिफेंस सेक्टर में कितना इजाफा हुआ है और डिफेंस के किन-किन सेक्टर में नई ऊंचाइयों को छुआ गया है, न्यूज 24 आपको सिलसिलेवार तरीके से पूरी जानकारी देगा.

पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान डिफेंस सेक्टर में कई गुना इजाफा हुआ है, जिसमें रक्षा बजट तीन गुना होकर 7.85 लाख करोड़ तक पहुंच गया है और रक्षा निर्यात में 56 गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी देखी जा रही है.

12 सालों में डिफेंस सेक्टर मे क्या-क्या बदलाव हुआ?

  • साल 2014 में रक्षा बजट लगभग 2.29 लाख करोड़ था, जो अब बढ़कर यानी 2026-27 में लगभग 7.85 लाख करोड़ का हो गया है. इसके साथ ही, Capital Acquisition का 75% हिस्सा स्वदेशी हथियार,कल पुर्जों के निर्माण के लिए अलग से रख दिया गया है.
  • मेक इन इंडिया के तहत बनाए जा रहे हथियार और दूसरे रक्षा सामानों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देने के कारण इंडियन डिफेंस मिनिस्ट्री का प्रोडक्शन 2024-25 में 1.50 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. भारतीय रक्षा मंत्रालय ने 2029 तक डिफेंस प्रोडक्शन को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिससे भारत दुनिया के टॉप-5 रक्षा निर्माता बन सके.
  • साल 2014 में निर्यात लगभग 700 करोड़ था, अब यह यानी साल 2026 में 38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया है. भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण जैसे ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम, रडार निर्यात कर रहा है.
  • देश में आयात निर्भरता जो पहले करीब 65% थी, वह घटकर अब लगभग 36% रह गई है.

आत्मनिर्भर भारत से बने रक्षा सामान बनी ताकत

2014-15 में डिफेंस प्रोडक्शन 46,429 करोड़ रुपये था. साल 2026-2027 में डिफेंस प्रोडक्शन 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. सरकार का लक्ष्य साल 2029 तक इसे 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का रखा है.

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डिफेंस सेक्टर में स्टार्टअप

ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और स्वायत्त हथियार प्रणालियों जैसे सेक्टर में इंडियन कंपनी बहुत ही तेजी से अपने कदम फैला रही है.

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प्राइवेट सेक्टर ने भी किया कमाल

स्वदेशी डिफेंस प्रोडक्शन में भी कमाल का आंकड़ा सामने आया है जहां पहले प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत थी तो अब यह बढ़कर 45 प्रतिशत से भी अधिक हो गई है. सरकार ने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI की स्वचालित सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी है, जिससे विदेशी कंपनियों और भारतीय उद्योगों के बीच तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा मिला है.

डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना

उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में दो डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना ने रक्षा निर्माण को नया आधार दिया है. इन क्षेत्रों में बड़े निवेश, रोजगार और सप्लाई-चेन नेटवर्क विकसित हो रहे हैं.

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डीआरडीओ को मिला अब तक का सबसे बड़ा समर्थन

स्वदेशी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए 2026-27 में डीआरडीओ का बजट बढ़ाकर 29,100 करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है. सरकार ने रक्षा अनुसंधान बजट का एक बड़ा हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए भी खोल दिया है.

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ऑर्गनाइजेशन डेवलपमेंट

तीनों सेना के बीच बेहतर तालमेल के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी CDS के पद को बनाया गया इसके अलावा थिएटर कमांड्स की स्थापना को एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

नोट: यह सभी जानकारी भारतीय रक्षा मंत्रालय की तरफ से दी गई ब्रीफिंग पर आधारित है.

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