कई बार आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा कि 7 से 8 घंटे की नींद लेने के बाद भी आपका शरीर थका हुआ महसूस करता है. पूरे दिन चिड़चिड़ापन रहता है, सुस्ती रहती है, काम में मन नहीं लगता और दिमाग भी पहले की तरह एक्टिव महसूस नहीं होता. ऐसे में सिर्फ नींद के घंटे गिनना काफी नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि एम्स के न्यूरोसर्जन डॉक्टर अमीर का कहना है कि सिर्फ नींद का टाइम जरूरी नहीं है. बल्कि यह भी मायने रखता है कि आपने नींद कितनी देर ली और उसकी क्वालिटी कितनी अच्छी थी. कई बार बेकार क्वालिटी की वजह से दिमाग ठीक तरह से काम नहीं कर पाता है. इसकी वजह से सिर दर्द और बातें भूलने जैसी बीमारी होने लगती है. इसलिए आपको नींद की क्वालिटी पर भी ध्यान देने की जरूरत है.
इसे भी पढ़ें- क्या ट्यूमर को ही कैंसर कहते हैं? जानिए Cancer और Tumor में क्या अंतर है
8 घंटे सोने के बाद भी क्यों रहती है थकान?
अगर सुबह उठने के बाद भी शरीर में थकान और दिमाग में भारीपन महसूस हो. तो यह खराब स्लीप क्वालिटी का संकेत हो सकता है. इसका मतलब है कि आप भले ही 8 घंटे बिस्तर पर रहे हों, लेकिन आपका दिमाग और शरीर उस दौरान अच्छी तरह आराम नहीं कर पाया. खराब नींद का असर अगले दिन आपकी एनर्जी और काम करने की क्षमता पर दिखाई दे सकता है. इसलिए सिर्फ ज्यादा घंटे सोना ही अच्छी नींद की गारंटी नहीं है.
सोने से पहले कॉफी-चाय लेने की आदत छोड़ें
अगर आपको रात में अच्छी और गहरी नींद चाहिए तो सोने के आसपास कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक या कैफीन वाली चीजों से बचना बेहतर है. कैफीन शरीर में कई घंटों तक रह सकता है और कुछ लोगों में रात की नींद आने में परेशानी हो सकती है. इसलिए कोशिश करें कि सोने से कम से कम 3 घंटे पहले कैफीन वाली चीजें न लें.
रोज बदलता स्लीप शेड्यूल भी बिगाड़ सकता है नींद
कभी रात 10 बजे सोना और कभी 2 बजे तक जागना आपकी बॉडी क्लॉक को इफेक्ट कर सकता है. इसलिए रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें. वीकेंड पर भी सोने और उठने का समय बहुत ज्यादा बदलने से बचें. एक ही टाइम बनाएं और नींद को बेहतर करें.
सोने से पहले मोबाइल से बनाएं दूरी
रात में बिस्तर पर जाने के बाद मोबाइल चलाना भी आपकी स्लीप रूटीन को बिगाड़ सकता है. सोशल मीडिया, वीडियो और लगातार स्क्रीन का इस्तेमाल करना आपके दिमाग को एक्टिव रखते हैं और सोने का समय आगे खिसक सकता है. इसलिए कोशिश करें कि सोने से पहले मोबाइल और दूसरी चीजों से दूरी बनाएं और अपना ख्याल रखें.
कैसे समझें कि आपकी नींद की क्वालिटी खराब है?
नींद पूरी लेने के बाद भी अगर बॉडी कई तरह के संकेत दे या परेशान करे तो दिक्कत हो सकती है. इसको लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि नींद की क्वालिटी खराब होने पर शरीर कई तरह के संकेत देता है. इसे हमें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
- सुबह उठते ही थकान होना
- दिनभर सुस्ती या नींद आना
- दिमाग भारी होना
- काम पर ध्यान न लगना
- रात में बार-बार नींद टूटना
- सिर दर्द होना
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये आदतें
- जहां आप सोते हैं वहां लाइट का सिस्टम लाइट रखें और जब सुने जाएं तो अंधेरा करके सोने की कोशिश करें.
- अगर आपकी अगले दिन छुट्टी है तो तब भी आपको अपनी नींद के टाइम पर ध्यान देना है. बिल्कुल भी लेट न करें और वक्त पर सोने की कोशिश करें.
- मोबाइल को लाइट बंद करने के बाद बिल्कुल न देखें. इससे नींद की क्वालिटी इफेक्ट हो सकती है. ऐसे में आपको पहले ही दूरी बना लेनी चाहिए.
- नींद का बिस्तर बेहतर करें और अगर वो ठीक नहीं है तो आपको नींद बार बार खुल सकती है. इससे आपकी नींद क्वालिटी इफेक्ट हो सकती है.
इसे भी पढ़ें- पुरानी खांसी से छुटकारा दिला सकता है अनार की कली का नुस्खा, आचार्य बालकृष्ण ने बताया उपाय
संबंधित खबरें
चलने-फिरने में फूलती है सांस तो सावधान! कमजोरी समझकर न करें नजरअंदाज
38 mins agoखाने के बाद बस 10 मिनट चलने की आदत कितनी फायदेमंद?
2 hrs agoप्लेग बीमारी क्या है और कैसे फैलती है? जानिए इसके लक्षण, क्या हैं तरीके
3 hrs agoक्या साथ बैठकर खाना खाने से फैलता है TB? AIIMS के डॉक्टरों ने बताया सच
6 hrs agoक्या रूस में फैल गया है प्लेग? रिसर्चर की मौत के बाद मचा हड़कंप
8 hrs agoआंवला जूस, फल या पाउडर? बदलते मौसम में किसका सेवन करना रहेगा बेहतर
10 hrs agoघाव भरने में हो रही है देरी? नजरअंदाज न करें, डायबिटीज का हो सकता है संकेत!
1 day agoशांति में भी कान में सुनाई देती है सीटी की आवाज? कहीं आपको टिनिटस तो नहीं!
1 day agoयूरिक एसिड बढ़ा तो शरीर के इन 5 हिस्सों में हो सकती है परेशानी
1 day agoवर्टिब्रल कम्प्रेशन फ्रैक्चर क्या होता है? जानिए कब कमजोर हो सकती है हड्डी
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
Sources- AIIMS
First published on:
Know More: Editorial Guidelines