World Sight Day 2026: हर साल अक्टूबर के दूसरे गुरुवार को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मकसद वैश्विक तौर पर लोगों को आंखों से जुड़ी दिक्कतों और आंखों की रोशनी जाने (Blindness) के संभावित कारणों के प्रति जागरूक कराना है. आंखों की दिक्कतों को अगर सही समय पर पकड़ लिया जाए और जरूरी इलाज ले लिया जाए तो आंखों की रोशनी को जाने से रोका जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसी बारे में बताते हुए उन कारणों का जिक्र किया है जो ब्लाइंडनेस की वजह बन सकते हैं और बताया है कि किस तरह आंखों की रोशनी जाने वाले कारकों से परहेज किया जा सकता है.
किन कारणों से जा सकती है आंखों की रोशनी
विजन इम्पेयरमेंट तब होता है जब आंखों की कोई कंडीशन हमारे देखने की क्षमता को प्रभावित करती है. जो भी व्यक्ति लंबी उम्र जीता है उसे आंख में किसी ना किसी तरह की कंडीशन हो ही जाती है जिसकी उम्रभर देखरेख करनी पड़ जाती है. मोतियाबिंद और रिफ्रेक्टिव एरर ऐसी कंडीशंस हैं जो आंखों के देखने कि क्षमता प्रभावित होती है या आंखों की रोशनी पूरी तरह जाने का कारण बनती है.
किन-किन कारणों से जा सकती है आंखों की रोशनी
वैश्विक तौर पर आंखों की रोशनी जाने या बलाइंडनेस की मुख्य वजहों में रिफ्रेक्टिव एरर्स, कैटेरेक्ट, डायबिटिक न्यूरोपेथी, ग्लूकोम और एज रिलेटेड मैक्युलर डिजनरेशन आते हैं. आंखों की रोशनी जाने की वजहें हर देश में अलग-अलग तरह की भी हो सकती हैं.
कम आय वाले देशों में बच्चों में आंखों की रोशनी जाने की मुख्य वजह जन्मजात मोतियाबिंद (congenital cataract) जबकि मध्यम आय वाले देशों में इसके लिए रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमेच्योरिटी यानी समय से पहले जन्में बच्चों में होने वाली आंख की बीमारी रेटिनोपैथी ज्यादा जिम्मेदार होती है.
आंखों की रोशनी जाने से कैसे रोकें
आंखों की दिक्क्तों की रोकथाम और इलाज से आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है. हालांकि, देखने की क्षमता खोने की वजह बनने वाले कुछ कारण जैसे संक्रमण, चोट, असुरक्षित दवाओं और जन्म के दौरान बच्चे के आस-पास होने वाली बीमारी में ऐसा करना मुमकिन नहीं है, लेकिन डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी दिक्कतों की शुरुआत में ही पहचान कर ली जाए, समय से मोतियाबिंद की सर्जरी करवा ली जाए तो आंखों की रोशनी जाने से रोका जा सकता है.
आंखों की रोशनी जाने के शुरुआती संकेत क्या होते हैं
- धुंधला नजर आने लगता है, चीजें साफ नहीं दिखतीं और पलक फड़काने पर भी कुछ साफ नहीं दिखता.
- रात के समय देखने में दिक्कत आने लगती है, कुछ देखने के लिए बेहद तेज रोशनी की जरूरत पड़ने लगती है.
- पेरिफेरल विजन जाने लगता है यानी तिरछा दिखना बंद हो जाता है और व्यक्ति अक्सर ही चीजों से टकराने लगता है.
- आंखों के सामने फ्लैशेस, जाले या तेज रोशनी नजर आने लगती है.
- रंग धुंधले नजर आने लगते हैं या पीले धब्बेदार दिखते हैं.
- लकीरें टेढ़ी-मेढ़ी नजर आने लगती हैं या लकीरों के बीच के हिस्से नजर नहीं आते.
- रोशनी के आस-पास हेलो या रिंग नजर आने लगती है, लैंप्स और हेडलाइट्स के चारों तरफ रिंग बनी होती है.
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