गर्म और खट्टा खाना फॉयल में रखने से क्या होता है? एक्सपर्ट ने बताया शरीर का कौन सा अंग हो जाता है कमजोर

Aluminum Foil Mein Khatti Cheez Rakhna: एल्युमिनियम फॉयल में अक्सर खाना लपेटकर दिया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है यह आदत खतरनाक साबित हो सकती है. एक्सपर्ट गर्म और खट्टा खाना लपेटने से मना करते हैं. 

Aluminum Foil Mein Khatti Cheez Rakhna

फॉयल में गर्म खट्टा खाना क्यों बनाता है खतरनाक? Image Credit- News24

Why Aluminum Foil Is Not Good: आजकल खाने को गर्म रखने के लिए फॉयल पेपर का इस्तेमाल किया जाता है. इससे रोटी फ्रेश रहती है और खाना भी गर्म रहता है. इसका इस्तेमाल ना सिर्फ घरों में बल्कि होटल और ढाबों तक में किया जाता है. इसमें अक्सर लोग पराठा, सब्जी, चावल या पैक्ड फूड रखते हैं, लेकिन क्या आपको पता है यह आदत हेल्थ के लिए कितनी नुकसान साबित हो रही है? आचार्य मनीष जी ने बताया है कि अगर आप भी फॉयल पेपर में गर्म या खट्टी चीजें लपेटते हैं तो तुरंत आदत को बदलें, लेकिन क्यों? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं. 

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फॉयल में गर्म खट्टा खाना क्यों बनाता है खतरनाक?

एल्युमिनियम फॉयल एक रिएक्टिव चीज है, जिसे गर्म, खट्टे या नमकीन खाने के साथ रखा जाता है तो दोनों मिलकर रिएक्ट करते हैं और केमिकल में बदल जाते हैं. साथ ही, एल्युमिनियम घुलकर खाने में मिल जाता है और अनजाने में एल्युमिनियम का सेवन करने लगते हैं. 

शरीर का कौन-सा अंग होता है सबसे ज्यादा कमजोर?

अगर लगातार इस पेपर का इस्तेमाल किया जाता है तो किडनी कमजोर होने लगती है. एक्सपर्ट का कहना है कि इसका असर सबसे ज्यादा किडनी पर पड़ता है. एल्युमिनियम शरीर में पहुंचकर सबसे पहले किडनी पर असर डालता है. किडनी का काम खून को साफ करना और टॉक्सिन्स बाहर निकालना होता है. जब लंबे समय तक एल्युमिनियम शरीर में जाता रहता है तो यह पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है. 

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  • किडनी पर दबाव पड़ना 
  • टॉक्सिन्स बाहर निकालना
  • किडनी फंक्शन कमजोर होना 

एल्युमिनियम फॉयल से होने वाली बीमारियां कौन सी हैं? 

पाचन तंत्र पर असर पड़ना- एल्युमिनियम का ज्यादा इस्तेमाल करना या गर्म खाना रखना पेट में जलन, गैस, एसिडिटी और अपच की समस्या पैदा कर सकता है.
दिमाग पर असर- कई रिसर्च के मुताबिक एल्युमिनियम एक्सपोजर को न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जोड़ा गया है. इससे दिमाग पर काफी असर पड़ता है और इंसान का दिमाग धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. 
हड्डियां कमजोर होना- एल्युमिनियम शरीर में मौजूद कैल्शियम को खत्म करने या कम करने का काम करता है. अगर आप इसका रोजाना इस्तेमाल करेंगे तो यकीनन हड्डियों पर असर होने लगेगा. 

क्या फॉयल का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए?

इसको लेकर आचार्य मनीष जी का कहना है कि ऐसा नहीं है क्योंकि अगर सही तरीके से इसमें खाना रखा जाए तो किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा. बेहतर होगा कि आप गर्म या खट्टी चीजें इसमें लपेटने से बचें. बाकी स्टील, पीतल या मिट्टी के बर्तन खाने को रखने के लिए इस्तेमाल करें. 

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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