पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स को न करें इग्नोर, शरीर के ये संकेत दे सकते हैं बीमारी का इशारा

Menstrual Blood Clots: पीरियड्स के दौरान छोटे ब्लड क्लॉट्स निकलना कई बार नॉर्मल माना जाता है, लेकिन बार-बार निकलने वाले थक्के, ब्लीडिंग या दर्द होना किसी अंदरूनी समस्याओं की ओर इशारा करता है. इसलिए सही वक्त पर इलाज कराने की खास जरूरत होती है. 

Menstrual Blood Clots

पीरियड्स के शुरुआती दिनों में छोटे ब्लड क्लॉट्स निकलना नॉर्मल हो सकता है. Image Credit- AI

Bar Bar Khoon Aana: पीरियड्स के दिनों में महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. इसमें से कुछ नॉर्मल तो कुछ गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं. हालांकि, पेट में दर्द, कमर में ऐंठन, थकान और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं बहुत ही आम मानी जाती है. इस दौरान कई महिलाओं को पीरियड्स के खून में छोटे-छोटे थक्के यानी ब्लड क्लॉट्स भी दिखाई देते हैं. आमतौर पर मासिक धर्म के दौरान छोटे थक्के निकलना नॉर्मल हो सकता है, लेकिन अगर ये बार-बार बड़े शेप में दिखाई दें या इनके साथ ब्लीडिंग ज्यादा हो तो इन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. कई बार पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स हार्मोन से जुड़ी समस्या हो सकता है. ऐसे में इनके शेप, रंग और साथ दिखाई देने वाले लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है. नेशनल हेल्थ सर्विस की एक रिसर्च से जानते हैं कि पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स क्यों बनते हैं, किन संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए और कब डॉक्टर से कब बात करनी चाहिए.

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पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स क्यों बनते हैं?

पीरियड्स के दौरान बच्चेदानी की अंदरूनी लेयर टूटकर खून बनकर बाहर निकलती है. जब ब्लीडिंग ज्यादा होती है तो खून कुछ समय के लिए बच्चेदानी या योनि में जमा हो सकता है और थक्के बना सकता है. इसलिए शरीर में खून को जमने से रोकने वाले तत्व आमतौर पर इन थक्कों को बाहर आने नहीं देते, लेकिन हैवी ब्लीडिंग के दौरान बड़े क्लॉट्स दिखाई दे सकते हैं. पीरियड्स के शुरुआती दिनों में छोटे ब्लड क्लॉट्स निकलना नॉर्मल हो सकता है. हालांकि, अगर हर महीने बड़े थक्के निकलते हैं या पीरियड्स के पैटर्न में अचानक बदलाव आता है तो इसकी वजह जानना जरूरी है. 

पीरियड्स में खून के थक्के आने के लक्षण

  • पीरियड्स में छोटे खून के थक्के आना
  • बार-बार बड़े खून के थक्के आना
  • पीरियड्स 7 दिन से ज्यादा चलना
  • तेज पेट या पेल्विक में दर्द होना
  • थकान, कमजोरी या चक्कर आना
  • पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना
  • ज्यादा ब्लीडिंग होना
  • बार-बार पैड या टैम्पोन बदलना

पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स बनने के पीछे हो सकती हैं ये समस्याएं

हार्मोनल असंतुलन- एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन को बनाए रखने का काम करते हैं.  इसमें बदलाव होने पर बच्चेदानी की लेयर मोटी हो जाती है, जिससे क्लॉट्स की समस्या पैदा होने लगती है.

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फाइब्रॉएड- बच्चेदानी में बनने वाली गांठों को फाइब्रॉएड कहा जाता है. कुछ महिलाओं में इनकी वजह से पीरियड्स लंबे समय तक चल सकते हैं, ब्लीडिंग ज्यादा हो सकती है और बड़े ब्लड क्लॉट्स निकल सकते हैं. 

एंडोमेट्रियोसिस या एडेनोमायोसिस- एंडोमेट्रियोसिस में बच्चेदानी की अंदरूनी लेयर जैसी कोशिकाएं लेयर के बाहर बढ़ने लगती हैं, जबकि एडेनोमायोसिस में ऐसी कोशिकाएं सेल्स तक पहुंच जाती हैं. 

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थायराइड से जुड़ी समस्या- थायराइड हार्मोन में गड़बड़ी और ब्लीडिंग को इफेक्ट करता है. इससे भी यह परेशानी पैदा हो सकती है. 

खून से जुड़ी समस्याएं- कुछ महिलाओं में खून के नॉर्मल तरीके से जमने में भी परेशानी होती है. ऐसी परेशानी में पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो सकती है. 

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इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स के साथ कुछ लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नॉर्मल मानकर टालना नहीं चाहिए.

  • अगर बार-बार लगभग 2.5 सेंटीमीटर या उससे बड़े थक्के निकल रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लें.
  • हर एक-दो घंटे में पैड पूरी तरह भीग रहा है तो यह हैवी पीरियड्स का संकेत हो सकता है.
  • लगातार लंबे समय तक ब्लीडिंग होना भी गंभीर हो सकता है.  
  • ज्यादा ब्लीडिंग की वजह से शरीर में आयरन की कमी और एनीमिया हो सकता है. इसके लक्षणों में कमजोरी, सांस फूलना और चक्कर आना शामिल हैं.
  • पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द, पेट के निचले हिस्से में दबाव या अचानक बढ़ती ऐंठन को नजरअंदाज न करें. 

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

अगर लगातार दो घंटे तक हर घंटे एक या ज्यादा पैड पूरी तरह भीग रहे हैं तो डॉक्टर से बात करें. अगर इसके साथ चक्कर, बेहोशी, सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी हो तो इमरजेंसी मेडिकल की मदद लें. इसके अलावा, अगर पीरियड्स मिस होने के बाद ब्लीडिंग और थक्के निकल रहे हैं, खासकर पेट में तेज या एक तरफ दर्द के साथ तो तुरंत टेस्ट कराएं.

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पीरियड्स के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?

  • पीरियड्स कितने दिन चल रहे हैं, कितनी बार पैड बदलना पड़ता है और थक्के कितने बड़े हैं, इन बातों को नोट करें. 
  • हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, बीन्स और आयरन से भरपूर चीजों को डाइट में शामिल करें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से बात करें. 
  • शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए भरपूर मात्रा में पानी पिएं. 
  • अगर हर महीने बहुत तेज दर्द होता है या दर्द कामकाज को इफेक्ट कर रहा है तो बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. 

पीरियड्स में खून के थक्के आने पर कौन सा टेस्ट कराना चाहिए?

पीरियड्स में ब्लड क्लॉट्स आने के बाद इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर से बात करें और टेस्ट कराएं. जरूरत पड़ने पर हीमोग्लोबिन और दूसरे टेस्ट किए जा सकते हैं. इससे ब्लीडिंग के कारण होने वाली एनीमिया का पता लगाया जा सकता है. बाकी डॉक्टर पेल्विक अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भी कह सकते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

Source- NHS, CDC

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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