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'लड़कियों को स्कर्ट में स्कूल ना भेजें…' पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री ने किस बीमारी से बचाव के लिए कही यह बात

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरदवत मुखर्जी ने स्कूलों से अपील की है कि वे छात्रों और छात्राओं को पूरे कपड़े पहनकर स्कूल आने दें. स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि 3 महीनों के लिए लड़कियों को स्कर्ट के बजाय सलवार-सूट में स्कूल आने दिया जाए.

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स्कूल में स्कर्ट के बजाय सलवार सूट क्यों? AI Generated Image

School Uniform: पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरदवत मुखर्जी ने राज्य के सभी स्कूलों से कहा है कि उन्हें डेंगू सीजन में स्कूली बच्चों को हाथ-पैरों को पूरी तरह से कवर करने वाले कपड़ों में स्कूल बुलाना चाहिए. स्वास्थ्य मंत्रालय हेडक्वार्टर में हुई हाई लेवर रिव्यू मीटिंग के दौरान डॉ. शरदवत मुखर्जी ने खासतौर से लड़िकयों को स्कर्ट पहनकर स्कूल भेजने से मना किया है. उनका कहना है कि अगले 3 महीनों के लिए स्कर्ट के बजाय लड़कियां सलवार-सूट पहनकर स्कूल जाएं. इस सुझाव के पीछे स्वास्थ्य मंत्री ने सेहत से जुड़ा यह बड़ा कारण बताया है.

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लड़कियों को स्कर्ट पहनकर स्कूल जाने से किया मना

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरदवत ने कहा कि “हम डेंगू को पूरी तरह से रोक सकते हैं. इसके लिए जागरूकता जरूरी है.” स्वास्थ्य मंत्री ने अगले 3 महीनों तक सावधानी बरतने की अपील की है और कहा है कि 3 महीनों के लिए स्कूल की यूनिफॉर्म चाहे जो भी हो लेकिन छात्रों को पूरे बाजू के कपड़े पहनने की अनुमति दी जाए. उन्होंने कहा कि लड़कियों को स्कर्ट पहनकर स्कूल नहीं भेजना चाहिए, इसके बजाय सलवार-सूट पहनने की अनुमति दी जाए जिससे पैर पूरी तरह ढके रहें.

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घुटने तक मोजे पहनकर जाने की बात पर स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि यह तरीका काम नहीं करेगा क्योंकि घुटने तक के मोजे त्वचा से चिपके रहते हैं और काफी पतले होते हैं. इसलिए मोजों के जरिए भी मच्छर बच्चों को काट सकते हैं.

क्या स्कर्ट के बजाय सलवार सूट पहनना प्रभावी हो सकता है

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लड़कियों का स्कूल में स्कर्ट पहनकर जाने के बजाय सलवार सूट पहनकर जाना डेंगू से बचाव में कितना प्रभावी हो सकता है, इसपर फोर्टिस अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड, हेड एंड नेक सर्जन डॉ. अंबेश सिंह ने बताया, “कभी-कभी बचाव महंगा या कोम्प्लिकेटेड हो ऐसा जरूरी नहीं है. कपड़ों को बचाव के नजरिए से देखना चाहिए – यह सस्ता है और ज्यादा रिस्क वाले सीजन में बचाव का एक दमदार तरीका हो सकता है. अगर स्कूल यूनिफॉर्म में कुछ समय के लिए बदलाव किया जाए जिससे मच्छरों की चपेट में आने से बचा जा सकता है तो यह डेंगू से बचाव की एक अच्छी स्ट्रैटजी हो सकती है.”

डेंगू से बचने के लिए क्या किया जा सकता है

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डेंगू के मच्छर ज्यादातर दिन के समय काटते हैं. यह मच्छर आस-पास जमे पानी में पनपते हैं. इसीलिए इस सीजन में पानी के बर्तनों को ढककर रखने की सलाह दी जाती है. कोशिश रहती है कि बेवजह कहीं पानी जमा ना हो पाए. इसके अलावा, पूरे कपड़े पहनने पर मच्छरों की त्वचा तक पहुंच कम होती है और वे व्यक्ति को नहीं काट पाते हैं. सोते समय मच्छरदानी और बाहर निकलते समय मस्कीटो रेपलेंट क्रीम लगाने पर भी फायदा मिलता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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