इन 7 लोगों में रहता है टीबी का ज्यादा खतरा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा समय पर जांच बना सकती है जान

Risk Factors Of TB: स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसका समय रहते इलाज शुरू करना जरूरी है. ऐसे में यहां जानिए वो कौन से लोग हैं जो टीबी की चपेट में जल्दी आते हैं और किन्हें समय पर टीबी की जांच करवानी चाहिए.

TB Risk Factors

टीबी के लक्षण क्या हैं? AI Generated Image

TB Risk Factors: ट्यूबरकुलोसिस (Tuberculosis) मायकोबेक्टिरियम ट्यूबरकुलोसिस बेक्टीरियम की चपेट में आने से होता है. टीबी आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों पर भी असर डालता है जैसे, दिमाग, किडनी और रीढ़ की हड्डी. टीबी फेफड़ों के साथ ही लिम्फ नोड्स को भी प्रभावित करता है. लेकिन, टीबी के कीटाणुओं के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को टीबी नहीं होती बल्कि कुछ में इनएक्टिव टीबी और एक्टिव टीबी डिजीज हो सकती है. ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसे 7 लोगों के बारे में बताया है जो टीबी के रिस्क फैक्टर्स में आते हैं यानी जिन्हें टीबी का ज्यादा खतरा होता है. जानिए कौन हैं ये लोग.

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किन लोगों में रहता है टीबी का ज्यादा खतरा

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन 7 लोगों में टीबी का ज्यादा खतरा रहता है –

  • जिन लोगों को पिछले 5 सालों में टीबी हुआ है उन्हें फिर से टीबी हो सकता है
  • व्यक्ति जो टीबी मरीज से निकट संपर्क में आया हो
  • धूम्रपान करने वाले लोगों में
  • मदिरा या शराब का सेवन करने वाले लोगों में टीबी का खतरा ज्यादा होता है
  • मधुमेह रोगी टीबी के रिस्क फैक्टर्स में शामिल हैं
  • कुपोषित टीबी की चपेट में जल्दी आते हैं
  • 60 से ज्यादा उम्र के वृद्ध टीबी की चपेट में आ सकते हैं.

इनएक्टिव और एक्टिव टीबी क्या होता है

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यूएस के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, जब टीबी जर्म्स शरीर में व्यक्ति को बीमार किए बिना रहते हैं तो इसे इनएक्टिव टीबी कहते हैं. इन लोगों को बीमार महसूस नहीं होता है और इनमें किसी तरह के लक्षण नहीं दिखते और इनसे किसी और को टीबी नहीं होता है. लेकिन, बिना किसी इलाज के इनएक्टिव टीबी एक्टिव टीबी डिजीज (Active TB Disease) बन सकता है.

टीबी के जर्म्स जब एक्टिव हो जाते हैं और इम्यून सिस्टम उन्हें बढ़ने से नहीं रोक पाता है तो इसे एक्टिव टीबी डिजीज कहते हैं. इसमें व्यक्ति को बीमारी महसूस होता है. इनमें लक्षण भी दिखते हैं और इन लोगों से दूसरों में टीबी फैल सकता है.

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टीबी के संकेत और लक्षण क्या हैं

  • खांसी आती है जो लंबे समय तक रहती है
  • छाती में दर्द होता है
  • खांसी के साथ खून निकलता है, बलगम में खून आता है
  • कमजोरी और थकान महसूस होती है
  • वजन कम होने लगता है
  • भूख में कमी आ जाती है
  • ठंड महसूस होती है
  • बुखार आता है
  • रात के समय पसीने आने लगते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.


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Source - Health Ministry, CDC

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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