Sharir Mein Ganth Hona: शरीर में गांठ महसूस होना अक्सर चिंता का कारण बनता है.अच्छी बात यह है कि अधिकांश गांठें कैंसर नहीं होतीं. वे चर्बी की गांठ, सिस्ट, संक्रमण या चोट के कारण भी हो सकती हैं, लेकिन कुछ गांठें सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा जैसी दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती हैं. इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कब किसी गांठ को हल्के में नहीं लेना चाहिए. इसको लेकर एक्सपर्ट डॉक्टर मीनू वालिया (मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी, ब्रेस्ट, गायनेकोलॉजी, थोरेसिक एवं जीआई) का कहना है कि हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन हर बढ़ती हुई या असामान्य गांठ की जांच जरूर होनी चाहिए. अगर कोई गांठ लगातार बढ़ रही है, बिना दर्द के है या लंबे समय तक बनी हुई है तो उसे नजरअंदाज न करें. समय पर डॉक्टर से बात करें और इलाज करवाएं, लेकिन इससे पहले इसके गंभीर संकेतों की पहचान करें.
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सारकोमा क्या है?
सारकोमा एक ऐसा कैंसर है जो शरीर के मांसपेशियों, चर्बी, नसों, रक्त वाहिकाओं, फाइब्रस टिश्यू और अन्य संयोजी ऊतकों में विकसित हो सकता है. यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन सबसे अधिक हाथों और पैरों में देखा जाता है. हाालंकि, यह कैंसर दुर्लभ है, इसलिए शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं या सामान्य गांठ समझ लिए जाते हैं.
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क्या इसकी गांठ दर्द करती है?
इसको लेकर एक्सपर्ट डॉक्टर मीनू वालिया (मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी, ब्रेस्ट, गायनेकोलॉजी, थोरेसिक एवं जीआई) का कहना है कि कई मरीजों को महीनों पहले एक छोटी सी गांठ महसूस होती है, जो बिना दर्द के होती है. इसलिए बहुत सारे लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं और इलाज में देरी करते हैं. इसकी वजह से स्थिति गंभीर हो जाती है और सारकोमा की गांठ बढ़ने लगती है.
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कब कराना चाहिए टेस्ट?
अगर शरीर में कोई गांठ लगातार आकार में बढ़ रही हो, पांच सेंटीमीटर (लगभग एक नींबू के आकार) से बड़ी हो, शरीर के अंदर गहराई में महसूस हो, या कई सप्ताह तक बनी रहे, तो उसकी जांच जरूर कराएं. अगर गांठ के साथ दर्द, सुन्नपन, चलने-फिरने में परेशानी या आसपास की मांसपेशियों पर दबाव महसूस हो तो डॉक्टर से बात करें.
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गांठ को सही करने के लिए क्या ना करें?
हर बढ़ती हुई गांठ की मालिश करना, गर्म सिकाई करना या बिना जांच के उसे नॉर्मल मान लेना सही नहीं है. सारकोमा से राहत सिर्फ क्लिनिकल जांच, इमेजिंग (जैसे एमआरआई या सीटी स्कैन) और बायोप्सी के बाद ही किया जा सकता है. कई बार गलत तरीके से की गई शुरुआती सर्जरी भी आगे के इलाज को मुश्किल बना सकती है. इसलिए अगर सारकोमा का शक है तो टेस्ट और बायोप्सी का सही जगह और वक्त पर करवाएं.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.