Insulin Injection Benefits For Diabetes: आज के समय में बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान और कम शारीरिक गतिविधि के कारण डायबिटीज (Diabetes) तेजी से फैलने वाली बीमारी बनती जा रही है. इसे आम भाषा में शुगर की बीमारी भी कहा जाता है, जिसे अक्सर लोग समझते हैं कि यह सिर्फ मीठा खाने से ही होती है. लेकिन असल में यह बीमारी शरीर में बनने वाले इंसुलिन हार्मोन (Insulin Harmones) और उसके सही तरीके से काम न करने से जुड़ी होती है. जब हम खाना खाते हैं तो वह पाचन प्रक्रिया के बाद ग्लूकोज में बदल जाता है और यह ग्लूकोज खून में पहुंच जाता है.

सामान्य स्थिति में इंसुलिन इस ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा में बदलने में मदद करता है, लेकिन जब शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है या शरीर इसे सही तरह से ग्लूकोज का इस्तेमाल नहीं कर पाता, तब खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है और डायबिटीज की समस्या पैदा होती है. बस इसी समस्या को ठीक करने के लिए डॉक्टर इंसुलिन इंजेक्शन का रास्ता अपनाते हैं, आइए जानते हैं कैसे काम करती है यह चीज?

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इंसुलिन इंजेक्शन क्या होता है और यह कैसे काम करता है? Insulin Injection Kaise Kaam Karta Hai

इंसुलिन इंजेक्शन डायबिटीज को कंट्रोल में करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, जो तब इस्तेमाल होता है जब शरीर खुद पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता या दवाओं के बावजूद शुगर लेवल कंट्रोल में नहीं आता, तब डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं. यह इंजेक्शन त्वचा के नीचे दिया जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में सबक्यूटेनियस इंजेक्शन कहा जाता है. इंजेक्शन के जरिए शरीर में पहुंचा इंसुलिन धीरे-धीरे खून में मिलकर अतिरिक्त ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, इससे ब्लड शुगर (Blood Sugar) का स्तर संतुलित रहता है और शरीर को जरूरी ऊर्जा मिलती रहती है. सही समय पर और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक लिया गया इंसुलिन का इंजेक्शन डायबिटीज से होने वाली कई गंभीर मुश्किलों को कम करने में मदद कर सकता है, यही कारण है कि अक्सर डायबिटीज के मरीज इस पेन (इंजेक्शन) का इस्तेमाल करते हैं.

किन लोगों को पड़ सकती है इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत?  Diabetes Me Insulin Kab Lena Padta Hai

कुछ खास परिस्थितियों में डॉक्टर मरीज को इंसुलिन शुरू करने की सलाह दे सकते हैं. जैसे;

  • जब किसी व्यक्ति का फास्टिंग ब्लड शुगर लंबे समय तक बहुत ज्यादा रहता है और सामान्य दवाओं से भी इसे कंट्रोल में नहीं आता है, तो ऐसी स्थिति में इस इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है.
  • अगर HbA1c रिपोर्ट लगातार 7% या उससे अधिक बनी रहती है, तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर में शुगर कंट्रोल के लिए अतिरिक्त इंसुलिन की जरूरत है, उस जरूरत को पूरा करने के लिए भी इंसुलिन इंजेक्शन का इस्तेमाल होता.
  • गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज (Gestational Diabetes) में भी कई बार डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं ताकि मां और बच्चे दोनों की सेहत सुरक्षित रहे.
  • जब किसी मरीज की बड़ी सर्जरी होने वाली हो या गंभीर संक्रमण हो, तब भी शुगर कंट्रोल रखने के लिए इंसुलिन दिया जा सकता है.
  • इसके अलावा किडनी या लिवर से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों में कुछ दवाएं सुरक्षित नहीं होतीं, इसलिए डॉक्टर इंसुलिन को बेहतर विकल्प मानते हैं.

इंसुलिन लेते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान

अगर आपको डॉक्टर ने इंसुलिन लेने की सलाह दी है, तो समझ लीजिए कि उसे कितनी बार लेना है और किस मात्रा में लेना है, यह सभी बात हर मरीज की शुगर रिपोर्ट और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है. आपके लिए कितना ठीक रहेगा यह डॉक्टर तय करेंगे, किसी अन्य मरीज की बात में आकर न अपने खुराक (डोसेज) को बढ़ाए न घटाएं. साथ ही संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, समय पर दवा और ब्लड शुगर की जांच भी उतनी ही जरूरी है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.