40 की उम्र में मसल मास गिरने पर दिखते हैं ये 5 संकेत, जानिए Muscle Mass बढ़ाने के लिए क्या खाना है जरूरी

How To Gain Muscle Mass: मसल मास शरीर के पोस्चर को बनाए रखता है, जोड़ों को सपोर्ट करता है और रोजमर्रा के काम करने की शरीर को ताकत देता है. ऐसे में मसल मास कम होने लगा है तो इसे पहचानना और मसल मास बढ़ाना जरूरी है.

Muscle mass

मसल मास कम होने की क्या वजह है?

What Is Mucle Mass: मसल मास कम होने को सार्कोपेनिया (Sarcopenia) कहा जाता है. पहले माना जाता था कि बढ़ती उम्र में या कहें वृद्धावस्था की ओर बढ़ रहे लोगों का मसल मास कम होता है, लेकिन अब 40 की उम्र में भी लोगों का मसल मास गिरता हुआ देखा जा रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय अपनी मसल्स को अटेंशन नहीं देते जिस कारण कम उम्र में भी मसल मास गिरने लगा है. एज रिलेटेड मसल मास को प्राइमेरी सार्कोपेनिया कहते हैं लेकिन कम उम्र में लोगों को सेकंडरी सार्कोपेनिया होने लगा है जिसकी वजह स्टेरॉइड लेना, क्रोनिक ऑर्गन फेलियर और न्यूरो मस्कुलर डिसोऑर्डर्स हैं. इसके अलावा, डायबिटीज का बढ़ता खतरा भी मसल मास कम होने की वजह बनता है. मसल मास क्या है, मसल मास कम (Low Muscle Mass) होने के क्या संकेत हैं और किस तरह मसल मास को बढ़ाया जा सकता है, जानिए यहां.

विज्ञापन
विज्ञापन

मसल मास क्या है और कम होने पर कैसे लक्षण दिखते हैं

मसल मास का मतलब है शरीर में मांसपेशियों का कुल वजन. अगर वजन तोला जाता है तो उसमें फैट और हड्डियों के साथ ही मसल मास का वजन भी शामिल होता है. मसल मास कम होने लगे तो शरीर की ताकत और स्थिरता भी कम होने लगती है. शरीर के पोस्चर से लेकर एनर्जी को रिस्टोर करने तक में मसल मास मदद करता है.

मसल मास कम होने पर ये संकेत दिख सकते हैं –

विज्ञापन
  • कमजोरी महसूस होने लगती है, शरीर थका हुआ लगता है और लगता है कि व्यक्ति उम्र से पहले ही बूढ़ा होने लगा है
  • अक्सर ही हाथों से चीजें छूटकर गिरने लगती हैं, यह ग्रिप कम होने पर होता है
  • सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत आती है, चलने की स्पीड कम हो जाती है
  • बैलेंस खराब होने लगता है, बिना सपोर्ट के खड़े रहना मुश्किल होने लगता है
  • अक्सर ही व्यक्ति गिरने लगता है

कैसे बढ़ेगा मसल मास

मसल मास बढ़ाने के लिए प्रोटीन इंटेक बढ़ाना जरूरी है. प्रोटीन इंटेक को अपने वजन के हिसाब से 1g/kg बढ़ाना जरूरी है. विटामिन डी से भरपूर चीजों को डाइट में शामिल करना जरूरी है जिससे टिशू ब्रेकडाउन रुक सके, नर्व हेल्थ और मसल्स कॉन्ट्रेक्शन को रोकने के लिए विटामिन बी12 का सेवन जरूरी है. इसके अलावा, पूरी नींद लेना जरूरी है. रोजाना कम से कम 7 घंटे की नींद लें जिससे मसल रिपेयर हो सके.

विज्ञापन

एक्सरसाइज को बनाएं लाइफस्टाइल का हिस्सा

  • मसल मास बढ़ाने के लिए फ्लेक्सिबिलिटी, जॉइंट मॉबिलिटी और स्टेबिलिटी बेहतर करने के लिए बैलेंस ट्रेनिंग करें.
  • ब्रिस्क वॉक या साइक्लिंग करें जिसे एंड्युरेंस बढ़े और हार्ट हेल्थ अच्छी रहे.
  • वेट्स या बैंड्स के साथ रेजिस्टेंस ट्रेनिंग करें, बॉडी वेट एक्सरसाइज करें जिससे मसल मास प्रीजर्व हो सके. हफ्ते में 2 से 3 बार 15 मिनट के लिए भी ऐसा किया जाए तो फायदा मिलता है.

यह भी पढ़ें – बूंद-बूंद करके पेशाब आना पुरुषों में इस बीमारी का हो सकता है संकेत, नॉर्मल समझकर ना करें इग्नोर

विज्ञापन

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ