Glucoma Treatment: ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया भी कहते हैं. यह आंखों की एक गंभीर बीमारी है जिसमें आंख की नस खराब हो जाती है. काला मोतिया में हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है. इस बीमारी को आखों का चोर भी कहते हैं क्योंकि इस बीमारी के कोई लक्षण नहीं होते हैं और एकदम से अंधापन आ जाता है. इसी बारे में और गहराई से बता रहे हैं एम्स के नेत्र विज्ञान प्रोफेसर डॉ. तनुज दादा. आइए जानते हैं काला मोतिया (Kala Motiya) किन कारणों से होता है और किन लोगों को समय रहते इसकी जांच करवा लेनी चाहिए.
काला मोतिया होने के क्या कारण हैं
डॉ. तनुज दादा बताते हैं कि भारत में काला मोतिया अंधेपन का एक प्रमुख कारण है लेकिन गंभीर बात यह है कि ज्यादातर लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं है. 100 में से 90% लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें काला मोतिया है.
ग्लूकोमा के 2 प्रमुख कारण होते हैं – ओपन एंगल ग्लूकोमा और दूसरा है एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा.
ओपन एंगल ग्लूकोमा – इसे ओपन एंगल मोतियाबिंद भी कहते हैं. इसमें आंखों की रोशनी बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे जाती है.
एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा – इसे एंगल क्लोजर मोतियाबिंद (Motiyabind) भी कहते हैं. यह एक गंभीर बीमारी है जिसमें आंखों में दर्द हो जाता है और यह एक इमरजेंसी होती है जिसमें बहुत जल्दी आंखों की रोशनी जा सकती है.
कुछ ऐसी दवाएं भी हैं जिनके कारण काला मोतिया हो सकता है. अगर लोग किसी भी प्रकार का स्टेरॉइड इस्तेमाल कर रहे हैं, चाहे वो आंखों के ड्रॉप्स हों, अस्थमा के लिए इनहेलर हो या अपने चेहरे पर कोई क्रीम लगा रहे हैं या स्टेरॉइड टेबलेट ले रहे हैं तो इन सब से काला मोतिया हो सकता है.
जिन लोगों को पेशाब की बीमारी है, पेट की बीमारी है या मस्तिष्क की बीमारी है जिसके लिए वे दवा ले रहे हैं तो इन सब दवाओं से भी काला मोतिया हो सकता है. ऐसे में अगर व्यक्ति किसी भी तरह की दवा ले रहा है तो उसे अपने डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए कि इससे काला मोतिया तो नहीं हो सकता.
- काला मोतिया की जांच करवानी जरूरी है. डॉ. दादा का कहना है कि अगर आपकी उम्र 35 से 40 साल की उम्र के बीच हैं तो अपनी आंखों का चेकअप जरूर करवाना चाहिए. किसी भी अस्पताल में जाकर आंखों का टेस्ट जरूर करवाएं.
- अगर उम्र 40 से 60 साल के बीच में है तो हर 2-3 साल में एक बार आंखों का चेकअप (Eye Checkup) जरूर कराना चाहिए.
- अगर उम्र 60 साल से ऊपर है तो साल में एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए.
- अगर परिवार में किसी एक को भी काला मोतिया है तो परिवार के सभी लोगों को अपनी आंखों का चेकअप करवाना चाहिए.
- अगर कभी आंखों में चोट लगी है, आप डायबिटीज (Diabetes) के मरीज हैं या आपका ब्लड प्रेशर ज्यादा है तो आपको नियमित रूप से हर साल आंखों का चेकअप करवाना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इन कंडीशंस में काला मोतिया का रिस्क बढ़ जाता है.
कैसे होता है काला मोतिया का टेस्ट
काला मोतिया के टेस्ट के लिए आंखों का प्रेशर चेक किया जाता है, ऑप्टिक नर्व की जांच की जाती है, लेंस लगाकर आंख के अंदर की नली की जांच की जाती है. इसके अलावा, आंखों का दृष्टिकोण और ओसीटी टेस्ट किया जाता है.
क्या काला मोतिया का इलाज है
काला मोतिया में लक्षण (Glucoma Symptoms) नहीं दिखते और आंखों की रोशनी जाने के बाद ही इसका पता चलता है, ऐसे में डॉक्टर इलाज में कोशिश करते हैं कि आंख की जितनी रोशनी रह गई है उसे बचाया जा सके. इससे उम्रभर बचाई गई आंखों की रोशनी को मेंटेन किया जा सकता है. आई ड्रॉप, दवाओं, लेजर और ऑपरेशन से काला मोतिया का इलाज हो सकता है. इसीलिए काला मोतिया की सही तरह से जांच और सही इलाज कराना जरूरी है.
- काला मोतिया या ग्लूकोमा के मरीजों को अपने खानपान में खासतौर से हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए.
- काला मोतिया के मरीजों को धूम्रपान या किसी भी तरह का तंबाकू नहीं लेना चाहिए.
- अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में सैर और व्यायाम शामिल करना चाहिए.
- अगर काला मोतिया है तो एकसाथ ज्यादा मात्रा में पानी ना पिएं.
- योगासन जरूर करें. योग में शीर्षासन नहीं करना चाहिए. ध्यान और प्राणायाम करने से शरीर का तनाव और आंखों का प्रेशर कम होता है. यह लाभदायक होता है.
- अगर काला मोतिया है या बढ़ रहा है तो स्कूटर या कार वगैरह नहीं चलाना चाहिए. अस्पताल जाते हुए भी किसी को साथ लेकर जाएं या फिर सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट जैसे मेट्रो या बस से ट्रेवल करें.
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