Delhi-NCR AQI: दिल्ली-एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बहुत खराब से जहरीली स्थिति में आ चुका है. कई क्षेत्रों में AQI 350 से 450 तक भी दर्ज किया जा रहा है. ऐसे में इस प्रदूषित हवा में सांस लेना जहरीली हवा में सांस लेने जैसा है. इस प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने पर सेहत को एक नहीं बल्कि कई नुकसान हो सकते हैं और आम लोगों से ज्यादा फेफड़ों या सांस के मरीजों के लिए यह हवा हानिकारक साबित होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रदूषित हवा सांस संबंधी इंफेक्शंस, दिल की बीमारी, स्ट्रोक और फेफड़ों की बीमारी के खतरे को बढ़ाती है. इसके अलावा, खराब एयर क्वालिटी स्टिलबर्थ, मिस्कैरिज और न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस के अलावा कॉग्निटिव इंपेयरमेंट और डिमेंशिया की संभावना बढ़ा सकती हैं. ऐसे में इस प्रदूषित हवा में फेफड़ों के मरीजों के लिए खासतौर से अपनी सेहत का ख्याल रखना जरूरी होता है.
प्रदूषित हवा में सांस लेने पर क्या होता है
अस्थमा और एलर्जी – मैक्स हेल्थकेयर की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा का रिस्क बढ़ता है और एलर्जी हो सकती है.
COPD – क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज लंबे समय तक वायु प्रदूषण में रहने के कारण होने वाली बीमारी है. जिन लोगों को पहले से ही फेफड़ों या सांस की बीमारी हो उनके लिए दिक्कत और ज्यादा बढ़ जाती है और सांस लेने तक में दिक्कत हो सकती है. इससे फेफड़ों में क्रोनिक इंफ्लेमेशन भी हो सकती है.
लंग कैंसर – प्रदूषित हवा में सांस लेते रहने से PM2.5, PAHs, बेंजीन और कार्सिनोजेनिक कंपोजिशन फेफड़ों में जा सकते हैं और फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) की वजह बन सकते हैं.
श्वसन संबंधी इंफेक्शंस – प्रदूषित हवा शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर बनाती है जिससे श्वसन संबंधी इंफेक्शंस होने की संभावना बढ़ जाती है. इससे न्यूमोनिया और ब्रोंकाइटिस जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है
प्रदूषित हवा छोटे बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है क्योंकि उनके फेफड़े कमजोर होते हैं. वृद्ध लोग वायु प्रदूषण की चपेट में आने पर बीमार पड़ सकते हैं क्योंकि उनके फेफड़े कमजोर होते हैं और क्षतिग्रस्त होने लगते हैं. जिन लोगों को पहले से अस्थमा है, COPD है या दिल की बीमारी है उनके लिए वायु प्रदूषण ज्यादा खतरनाक होता है. आखिर में जो लोग हैवी ट्रैफिक वाले इलाकों में रहते हैं या वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहते हैं उनमें बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
फेफड़ों के मरीज कैसे रहें वायु प्रदूषण से बचकर
- वायु प्रदूषण से जितना ज्यादा बचकर रह सकते हैं रहें. ज्यादा बाहर जाने से परहेज करें.
- अगर बाहर जा रहे हैं तो वायु प्रदूषण से बचाने वाले फेस मास्क लगाकर ही बाहर निकलें. कपड़े वाले मास्क के बजाए ऐसे मास्क पहनें जो प्रदूषण के छोटे कणों को फिल्टर करें और ये कण शरीर में ना जा पाएं.
- घर के अंदर एयर प्यूरिफायर लगाया जा सकता है. वे लोग जो खासतौर से प्रदूषण वाले इलाकों में रहते हैं उन्हें घर में एयर प्यूरिफायर लगाना चाहिए.
- इस बात का ध्यान रखें कि आप बाहर जाकर वर्कआउट या एक्सरसाइज ना करें.
- AQI चेक करते रहें और समय-समय पर फेफड़ों की जांच करते रहें. अपनी सेहत को खराब AQI वाले दिनों में सेहत को मॉनीटर करते रहना जरूरी है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.