फेफड़ों के मरीजों के लिए जानलेवा हो सकती है प्रदूषित हवा, गिरते AQI में इन 5 बातों का जरूर रखें ख्याल

Bad AQI And Lung Disease: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वायु प्रदूषण एक नहीं बल्कि कई तरह से सेहत को नुकसान पहुंचाता है. ऐसे में यहां जानिए किस तरह फेफड़ों के मरीज इस खराब AQI में अपना ध्यान रख सकते हैं.

Low AQI Lung Disease

खराब प्रदूषित हवा से सेहत को कैसे बचाए रखें, जानिए यहां. Image Credits - AI

Delhi-NCR AQI: दिल्ली-एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बहुत खराब से जहरीली स्थिति में आ चुका है. कई क्षेत्रों में AQI 350 से 450 तक भी दर्ज किया जा रहा है. ऐसे में इस प्रदूषित हवा में सांस लेना जहरीली हवा में सांस लेने जैसा है. इस प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने पर सेहत को एक नहीं बल्कि कई नुकसान हो सकते हैं और आम लोगों से ज्यादा फेफड़ों या सांस के मरीजों के लिए यह हवा हानिकारक साबित होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रदूषित हवा सांस संबंधी इंफेक्शंस, दिल की बीमारी, स्ट्रोक और फेफड़ों की बीमारी के खतरे को बढ़ाती है. इसके अलावा, खराब एयर क्वालिटी स्टिलबर्थ, मिस्कैरिज और न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस के अलावा कॉग्निटिव इंपेयरमेंट और डिमेंशिया की संभावना बढ़ा सकती हैं. ऐसे में इस प्रदूषित हवा में फेफड़ों के मरीजों के लिए खासतौर से अपनी सेहत का ख्याल रखना जरूरी होता है.

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प्रदूषित हवा में सांस लेने पर क्या होता है

अस्थमा और एलर्जी – मैक्स हेल्थकेयर की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण अस्थमा का रिस्क बढ़ता है और एलर्जी हो सकती है.

COPD – क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज लंबे समय तक वायु प्रदूषण में रहने के कारण होने वाली बीमारी है. जिन लोगों को पहले से ही फेफड़ों या सांस की बीमारी हो उनके लिए दिक्कत और ज्यादा बढ़ जाती है और सांस लेने तक में दिक्कत हो सकती है. इससे फेफड़ों में क्रोनिक इंफ्लेमेशन भी हो सकती है.

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लंग कैंसर – प्रदूषित हवा में सांस लेते रहने से PM2.5, PAHs, बेंजीन और कार्सिनोजेनिक कंपोजिशन फेफड़ों में जा सकते हैं और फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) की वजह बन सकते हैं.

श्वसन संबंधी इंफेक्शंस – प्रदूषित हवा शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर बनाती है जिससे श्वसन संबंधी इंफेक्शंस होने की संभावना बढ़ जाती है. इससे न्यूमोनिया और ब्रोंकाइटिस जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

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किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है

प्रदूषित हवा छोटे बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है क्योंकि उनके फेफड़े कमजोर होते हैं. वृद्ध लोग वायु प्रदूषण की चपेट में आने पर बीमार पड़ सकते हैं क्योंकि उनके फेफड़े कमजोर होते हैं और क्षतिग्रस्त होने लगते हैं. जिन लोगों को पहले से अस्थमा है, COPD है या दिल की बीमारी है उनके लिए वायु प्रदूषण ज्यादा खतरनाक होता है. आखिर में जो लोग हैवी ट्रैफिक वाले इलाकों में रहते हैं या वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहते हैं उनमें बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

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फेफड़ों के मरीज कैसे रहें वायु प्रदूषण से बचकर

  • वायु प्रदूषण से जितना ज्यादा बचकर रह सकते हैं रहें. ज्यादा बाहर जाने से परहेज करें.
  • अगर बाहर जा रहे हैं तो वायु प्रदूषण से बचाने वाले फेस मास्क लगाकर ही बाहर निकलें. कपड़े वाले मास्क के बजाए ऐसे मास्क पहनें जो प्रदूषण के छोटे कणों को फिल्टर करें और ये कण शरीर में ना जा पाएं.
  • घर के अंदर एयर प्यूरिफायर लगाया जा सकता है. वे लोग जो खासतौर से प्रदूषण वाले इलाकों में रहते हैं उन्हें घर में एयर प्यूरिफायर लगाना चाहिए.
  • इस बात का ध्यान रखें कि आप बाहर जाकर वर्कआउट या एक्सरसाइज ना करें.
  • AQI चेक करते रहें और समय-समय पर फेफड़ों की जांच करते रहें. अपनी सेहत को खराब AQI वाले दिनों में सेहत को मॉनीटर करते रहना जरूरी है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.


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Source  - WHO, MAX Healthcare 

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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