बच्चेदानी के मुंह में होने वाले कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? गायनेकोलॉजिस्ट ने बताया सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग का प्रोसेस

Cervical Cancer Ke Lakshan: सर्वाइकल कैंसर क्या है, किन महिलाओं को ज्यादा खतरा है, इसके क्या लक्षण होते हैं और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग कैसे होती है यह बता रही हैं गायनेकोलॉजिस्ट. इस तरह कैंसर बढ़ने से पहले इलाज शुरू किया जा सकता है.

Carcinoma of cervix cervical cancer

सर्वाइकल कैंसर के लिए कौन सा टेस्ट होता है?

Cervical Cancer Symptoms: सर्विक्स के कैंसर यानी बच्चेदानी के मुंह के हिस्से में होने वाले कैंसर को सर्वाइकल कैंसर कहते हैं. कैंसर की सेल्स ग्रूप ऑफ सेल्स हैं जो किसी कारणवश बढ़ने लगती हैं. यह ओवरग्रोथ नॉर्मल टिशू सेल्स को नष्ट करने लगती है. यही कैंसर सेल्स कहलाती हैं. इसी बारे में बताते हुए आब्स्टेट्रिशियन गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शीतल दयाल ने अपने यूट्यूब चैनल से वीडियो अपलोड किया है. डॉक्टर बताती हैं कि सर्विक्स के कैंसर को कार्सिनिमा ऑफ सर्विक्स (Carcinoma of cervix) भी कहते हैं. इस कैंसर के क्या लक्षण होते हैं, इसका क्या इलाज है और यह किन महिलाओं में ज्यादा होता है, आइए जानते हैं.

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सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों (Cervical Cancer Ke Lakshan) को पहचानना मुश्किल होता है. इस कैंसर में होने वाली दिक्कतें अन्य गायनाकॉलिजकल दिक्कतों से मेल खाती हैं और इसीलिए महिलाएं इन दिक्कतों को अक्सर ही आम समझने की गलती कर देती हैं. वाइट डिस्चार्ज होना, बदबूदार डिस्चार्ज होना, पीठ में दर्द होना, सेक्स के बाद स्पॉटिंग या ब्लीडिंग होना, कभी-कभी पीरियड्स हैवी होना वगैरह कुछ ऐसे आम लक्षण हैं जिन्हें महिलाएं इग्नोर कर देती हैं. जबतक महिलाएं डॉक्टर की सलाह लेती हैं तबतक कैंसर बन चुका है.

किन महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा ज्यादा होता है

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डॉक्टर बताती हैं कि सर्वाइकल कैंसर बनने से पहले ही अगर सेल्स की ग्रोथ बनने की स्टेज में इसे डिटेक्ट कर लिया जाए तो इन सेल्स को कैंसर या ट्यूमर बनने से रोका जा सकता है. 21 साल की उम्र से पहले और 60 साल की उम्र के बाद सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग आमतौर पर नहीं की जाती है क्योंकि इन एज ग्रूप में सर्वाइकल कैंसर होने की संभावना कम होती है. अन्य एज ग्रूप्स में सर्वाइकल कैंसर का खतरा रहता है.

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है. जो महिलाएं HPV के संक्रमण में आती है उन्हें सर्वाइकल कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है. मल्टीपल सेक्शुअल पार्टनर, अगर आपके पार्टनर के मल्टीपल सेक्शुअल पार्टनर हैं, 18 साल की उम्र से पहले सेक्सुअल संबंध बनाने पर, परिवार में अगर किसी को कार्सिनोमा सर्विक्स रहा हो या इम्यूनिटी के साथ दिक्कत होती है तो सर्वाइकल कैंसर हो सकता है.

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सर्वाइकल कैंसर को कैसे डिटेक्ट किया जाता है

जिन मरीजों में सर्वाइकल कैंसर के लक्षण नहीं दिखते हैं लेकिन वे इसकी जांच करवाना चाहते हैं तो स्क्रीनिंग टूल्स से जांच की जाती है. अगर मरीज को सर्वाइकल कैंसर के लक्षण दिखने लगे हैं तो जांच के लिए डायगनोस्टिक टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है.

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डॉक्टर बताती हैं कि जब मरीज स्क्रीनिंग के लिए आते हैं तो स्क्रीनिंग से पता चलता है कि उनमें प्रीकैंसरस सेल्स हैं या नहीं. स्क्रीनिंग में HPV DNA टेस्ट, साइटोलॉजी/पैपस्मियर टेस्ट और विजुएल एसेटिक टेस्ट किए जा सकते हैं. ज्यादातर साइटोलॉजी टेस्ट किया जाता है.

साइटोलॉजी टेस्ट कैसे किया जाता है

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साइटोलॉजी टेस्ट के लिए मरीज पीरियड्स से फ्री होने के बाद डॉक्टर से मिलती है. डॉक्टर को बताती है कि उसे पैपस्मियर/ साइटोलॉजी या सर्वाइकल स्क्रीनिंग टेस्ट कराना है. इसके बाद मरीज को अपने पेशाब का सेंपल देना होता है. टेस्ट के लिए पीठ के बल लेटना होता है और बिना एनेस्थीशिया या किसी तरह के सर्जिकल प्रोसेस के बिना सिंपल से टूल की मदद से टिशू सेंपल लिया जाता है. टेस्ट के लिए सेंपल भेजने के बाद 7 से 10 दिनों में रिपोर्ट मिल जाती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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