PMOS से परेशान लड़कियों के लिए मददगार हो सकता है योग, AIIMS ने स्टडी में पाए अच्छे रिजल्ट, बताया कैसे मिलेगा फायदा

PMOS Treatment: एम्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि PMOS में योग फायदेमंद हो सकता है. ऐसे में यहां जानिए किस-किस तरह से योग PMOS की दिक्कत में मदद करता है या असरदार साबित होता है.

PMOS

PMOS के क्या लक्षण होते हैं, जानिए यहां. Image Credits - AI

PMOS Treatment: पॉलीएंड्रोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम को PCOS यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम कहा जाता था. पहले पीएमओएस को केवल पीरियड्स से जुड़ी दिक्कत कहा जाता था, लेकिन हालिया रिसर्च से पता चला है कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली कंडीशन है जिसमें इंफ्लेमेशन हो सकती है, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है, माइटोकॉनड्रियल डिस्फंक्शन हो सकता है जिसमें सेल्स किस तरह से एनर्जी को बनाती हैं उसपर फर्क पड़ता है, मेटाबॉलिज्म और गट बैक्टीरिया प्रभावित होते हैं. इससे पता चलता है कि यह सिर्फ रिप्रोडक्टिव डिसोर्डर नहीं है. ऐसे में AIIMS के रिसर्चर्स ने पता लगाया है कि PMOS में योग किस तरह फायदेमंद हो सकता है.

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क्या योग कर सकता है मदद

AIIMS के रिसर्चर्स ने पीएमओएस से ग्रस्त महिलाओं को रेग्यूलर योग करने के लिए कहा. उन्होंने रेग्यूलर मॉनीटरिंग के जरिए देखा कि क्या महिलाओं की सेहत पर कोई प्रभाव पड़ रहा है या नहीं. रिसर्चर्स ने स्टडी की कि योग पीएमओएस में महिलाओं के मेटाबॉलिज्मस, माइटोकॉन्ड्रिया और गट बैक्टीरिया को कैसे प्रभावित करता है. 12 हफ्तों के स्ट्रक्चर्ड योगा प्रोग्राम से PMOS से परेशान महिलाओं में कुछ फायदे देखने को मिले, जैसे –

  • हार्मोनल बैलेंस में बेहतरी
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस का कम होना
  • माइटोकॉन्ड्रियल फंक्शन और मेटाबॉलिक मार्कर्स में बेहतरी.

रिसर्च बेहतर ब्लड फैट (लिपिड) लेवल्स और बेहतर गट बैक्टीरिया के लिए भी योग को फायदेमंद मानती है.

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PMOS में कैसे मिलता है फायदा

किशोरावस्था में लड़कियों को और महिलाओं को PMOS हो तो मेंस्ट्रुल हेल्थ और फर्टिलिटी, मेटाबॉलिज्म और गट हेल्थ, साइकोलॉजिकल वेल बिइंग और जीवन जीने के गुणवत्ता को बेहतर करके सेहत को ठीक रखा जा सकता है.

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PMOS के क्या लक्षण होते हैं

पीएमओएस ऐसी कंडीशन है जो लड़कियों में 18 साल की उम्र से पहले शुरू हो सकती है और मेनोपॉज तक रहती है. इसमें ओवरीज प्रभावित होती हैं और शरीर में कई तरह से प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में PMOS में ये लक्षण नजर आ सकते हैं –

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  • इर्रेग्यूलर पीरियड्स (Irregular Periods) होना या पीरियड्स के बीच में लंबा गैप आना
  • बहुत ज्यादा बाल आना या बाल झड़ना
  • वजन बढ़ना और वजन कम करने में दिक्कत आना
  • प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आना
  • मेंटल हेल्थ का प्रभावित होना, डिप्रेशन या एंजाइटी की संभावना बढ़ना
  • हर समय थकान महसूस करना
  • स्किन का ऑयली हो जाना या एक्ने ज्यादा होना
  • स्किन पर गहरे डार्क पैचेस नजर आना, जैसे गर्दन पर या बगलों में.

अगर शरीर पर इस तरह के लक्षण नजर आते हैं तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है जिससे PMOS को बेहतर तरह से मैनेज किया जा सके.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

Source - AIIMS

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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