Cardiovascular Diseases Symptoms: दुनियाभर में कार्डियोवेस्कुलर बीमारियां यानी दिल से जुड़ी बीमारियां जान जाने का एक बड़ा कारण हैं. इनमें से ज्यादातर कार्डियोवेस्कुलर बीमारियों को व्यवहारिक और पर्यावरण से जुड़े खतरों से बचकर भी दूर रखा जा सकता है. ऐसे में दिल की बीमारियों को समय रहते पहचानना और जरूरी एहतियात बरतते हुए इलाज लेना जरूरी होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ऐसे ही कुछ लक्षणों के बारे में बताया है जो कार्डियोवेस्कुलर बीमारियों में नजर आ सकते हैं. इन लक्षणों को पहचान लिया जाए तो समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है.
कार्डियोवेस्कुलर बीमारियों के लक्षण | Common Symptoms Of Cardiovascular Diseases
हार्ट अटैक और स्ट्रोक
रक्त धमनियों से जुड़ी बीमारियों में अक्सर ही लक्षण नजर नहीं आते हैं. हार्ट अटैक या स्ट्रोक ही इस अंडरलाइंग बीमारी का लक्षण हो सकता है. हार्ट अटैक आने के लक्षणों की बात करें तो इसमें छाती के बीच में असहजता या दर्द महसूस हो सकता है, इसके अलावा बांह में, बाएं कंधे, कोहनी, पीठ या जबड़े में दर्द और असहजता हो सकती है.
इन लक्षणों के साथ ही व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है, उल्टी आ सकती है, जी मिचलाने की दिक्कत हो सकती है, ठंडे पसीने आ सकते हैं और त्वचा पीली पड़ सकती है.
स्ट्रोक की बात की जाए तो स्ट्रोक में चेहरे, बांह या पैरों में अचानक से कमजोरी होने लगती है. इसके लक्षण अचानक से नजर आते हैं और ऐसे दिख सकते हैं –
- चेहरे, बांह, पैरों या शरीर के एक हिस्से का सुन्न हो जाना
- कंफ्यूजन होना, बोलने में दिक्कत होना या किसी बात को समझने में परेशानी महसूस होना
- एक या दोनों आंखों से देखने में दिक्कत होना
- चलने में दिक्कत होना, सिर घूमना, बैलेंस बिगड़ जाना और कोर्डिनेशन बनाने में दिक्कत आना
- बिना किसी कारण के सिर में तेज दर्द होना
- बेहोशी छाना या बेहोश होकर गिर जाना.
किसी भी व्यक्ति को अगर ये लक्षण महसूस होते हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
रूमेटिक बुखार के कारण हार्ट वाल्व्स या हार्ट मसल्स को नुकसान होने लगता है, इसे ही रूमेटिक हार्ट डिजीज कहते हैं. रूमेटिक हार्ट डिजीज में सांस फूलने लगती है, कमजोरी छा जाती है, हार्टबीट इर्रेग्यूलर हो जाती है, सीने में दर्द होता है और बेहोशी छाने लगती है.
रूमेटिक बुखार होने पर बुखार के साथ ही जोड़ों में सूजन और दर्द होने लगता है, जी मिचलाता है, उल्टी आती है और पेट में अकड़न हो सकती है.
कार्डियोवेस्कुलर डिजीज किन कारणों से होती है
ऐसे कुछ रिस्क फैक्टर्स हैं जो कार्डियोवेस्कुलर डिजीज की वजह बन सकते हैं. दिल की बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा खराब डाइट, फिजिकल इनएक्टिविटी, तंबाकू का इस्तेमाल, जरूरत से ज्यादा एल्कोहल पीने और प्रदूषण से बढ़ सकता है. इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड ग्लुकोज, बढ़े हुए लिपिड्स लेवल्स, ओवरवेट या मोटापा दिल की बीमारियों (Heart Disease) की वजह बन सकते हैं.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.