Leptospirosis In Monsoon: मानसून में जब-तब कभी भी बारिश आ सकती है. इस बारिश के कारण नदी-नाले ही नहीं बल्कि घर के बाहर की सड़क भी पानी से भर जाती है. यह पानी घंटों तक जमा रहता है और लोगों को इसमें पैर डुबोकर ही रास्ता नापना पड़ता है. मेट्रो से उतरकर या ऑफिस के नीचे भी बारिश का गंदा पानी नजर आता है. ज्यादातर लोगों को लगता है कि बारिश के पानी में अगर पैर डुब जाए या कहें गीला हो जाए तो ज्यादा से ज्यादा खुजली होगी, लेकिन पानी में इस तरह पैर जाने पर एक गंभीर संक्रमण लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis) भी हो सकता है. यहां जानिए क्या है लेप्टोस्पायरोसिस और इसके लक्षण कैसे नजर आते हैं.
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क्या है लेप्टोस्पायरोसिस | What Is Leptospirosis
बारिश के गंदे पानी के संपर्क में आने पर लेप्टोस्पायरोसिस हो सकता है. यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो लेपटोस्पिरा नामक बैक्टीरिया के कारण होता है. यह बैक्टीरिया संक्रमित कुत्तों, चूहों या दूसरे जानवरों के पेशाब से दूषित पानी और मिट्टी में पाया जाता है. अगर आपके पैरों पर किसी तरह की खरोंच है, छाला निकला है या फिर कट लग गया है तो बारिश के पानी में कदम रखने पर यह बैक्टीरिया आपके शरीर में जा सकता है. गंभीर मामलों में इस बैक्टीरिया का संक्रमण किडनी और लिवर ही नहीं बल्कि फेफड़ों तक भी फैल सकता है.
लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण (Leptospirosis Symptoms)
लेप्टोस्पायरोसिस के संपर्क में आने के 2 से 14 दिनों के भीतर ये लक्षण नजर आ सकते हैं –
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- ठंड लगना
- आंखों का लाल हो जाना
- उल्टी या मतली आना
- कमजोरी और थकान महसूस होना
- लिवर, फेफड़ों और किडनी की दिक्कतें भी हो सकती हैं
कैसे रहें लेप्टोस्पायरोसिस से बचकर
बारिश के पानी से लेप्टोस्पायरोसिस के अलावा फंगल इंफेक्शन, बैक्टीरियल इंफेक्शन, दाद, खुजली, लाल चकत्ते और नाखूनों में इंफेक्शन भी हो सकते हैं. ऐसे में लेप्टोस्पायरोसिस से बचने के लिए जितना हो सके गंदे और रुके हुए पानी में पैर रखने से बचें, वाटरप्रूफ जूते पहनें, पैर बारिश के पानी से गीले हो जाएं तो उन्हें साफ पानी से धोकर अच्छे से सुखा लें. अगर बुखार आ गया है तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी ना करें.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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