Piliya Ke Lakshan: लोग अक्सर ही पीलिया को त्वचा की दिक्कत समझ लेते हैं जबकि पीलिया त्वचा की नहीं बल्कि लिवर की दिक्कत है. पीलिया खुद एक बीमारी नहीं है बल्कि यह शरीर में होने वाली किसी दूसरी दिक्कत का लक्षण है. ऐसे में पीलिया (Jaundice) की जांच कराकर और इलाज से शरीर की दूसरी दिक्कतों का भी पता चलता है और समस्या की जड़ तक पहुंचा जा सकता है. पीलिया होने पर त्वचा का रंग पीला तो पड़ता है लेकिन त्वचा पीली दिखे या नहीं इसके अलावा भी कुछ ऐसे लक्षण हैं जो बताते हैं कि पीलिया हो गया है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), स्वास्थ्य मंत्रालय से जानिए पीलिया के क्या लक्षण होते हैं और इसे कैसे मैनेज किया जाता है.
पीलिया के क्या लक्षण हैं
- वायरल बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखने लगते हैं
- भूख नहीं लगती है
- जी मिचलाने लगता है और उल्टी आती है
- पेशाब का रंग गहरा पीला नजर आता है
- पेट में दर्द होने लगता है
- बुखार आता है
- खुजली होती है और मल का रंग मिट्टी के रंग जैसा दिखता है.
पीलिया में कौन से टेस्ट करवाए जाते हैं
पीलिया की जांच में सीरम बिलीरुबिन टेस्ट, लिवर एंजाइम टेस्ट, LFT, SGOT, SGPT और SAP टेस्ट किए जा सकते हैं.
पीलिया का इलाज कैसे होता है
पीलिया आइजोलेटेड रेज्ड बिलिरुबिन – पीलिया हेमोलिटिक डिजीज में फॉलिक एसिड 5mg की टैबलेट ली जाती है और हेमोटोलॉजिस्ट को दिखाया जाता है. कोंजिनिटल हाइपरबिलिरुबिनेमिया में हायर सेंटल में जांच होती है और नॉर्मल डाइट ली जाती है.
ऑब्सट्रक्टिव जॉन्डिस – अगर मरीज को बुखार होता है या TLC ज्यादा हो तो IV एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं. मरीज डिहाइड्रेटेड हो तो उसे IV फ्लुइड्स दिए जाते हैं. मरीज को CT स्कैन या MRCP वाले सेंटर भेजा जाता है. डाइट नॉर्मल रहती है.
लिवर पैरेन्काइमल रोग – वायरल हेपेटाइटिस में, एल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस में और ओटोइम्यून हेपेटाइटिस में लिवर पैरेन्काइमल रोग होता है. इसमें लिवर को क्षति हो जाती है. इसके इलाज में हाइड्रेशन मेंटेन किया जाता है, डाइट नॉर्मल ली जाती है. स्पेसिफिक इंफेक्शंस को ट्रीट किया जाता है. एल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस के लिए थियामिन लिया जाता है. एल्कोहल का सेवन बंद किया जाता है और डॉक्टर की बताई दवा ली जाती है.
सिस्टेमेटिक इंफेक्शंस – इसमें पीलिया के साथ कॉम्प्लिकेटेड मलेरिया, एंटेरिक फीवर, डेंगु बुखार, स्क्रब टाइफस या लेप्टोस्पाइरोसिस हो सकता है. इसके इलाज में सिस्टेमेटिक इंफेक्शन को ट्रीट किया जाता है और नॉर्मल डाइट ली जाती है.
अगर INR 1.5 से ज्यादा हो या बढ़ रहा हो तो यह लिवर फेलियर का संकेत हो सकता है. इसके अलावा, अल्टर्ड सेंसोरियम, ब्लीडिंग, बार-बार उल्टी होना या डिहाइड्रेशन होना या ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा कम होने जैसे ट्रिगर्स दिखने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.