Colon Cancer Ke Lakshan: आंतों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसका शुरुआती दौर में पता लगा लिया जाए तो सर्वाइल रेट बढ़ जाता है. इसी बारे में बताते हुए गेस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने अपने यूट्यूब चैनल से वीडियो शेयर किया है. डॉक्टर बताते हैं कि आंतों के कैंसर के कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें अक्सर ही हम आम समझकर इग्नोर कर देते हैं. कई बार ये लक्षण एसिडिटी जैसे लगते हैं, कभी इन्हें बवासीर समझ लिया जाता है, कभी खराब पीरियड तो कभी तनाव मानकर नजरअंदाज किया जाता है. लेकिन, यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है.
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आंतों के कैंसर के लक्षण | Colon Cancer Symptoms
मलत्याग की आदत का लगातार बदलना
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डॉक्टर बताते हैं कि मलत्याग की आदत का लगातार बदलना खतरे की घंटी हो सकता है. कब्ज, दस्त या दोनों होते रहना आम दिक्कत लग सकता है लेकिन बिना किसी ठोस कारण के अगर कई हफ्तों से यह दिक्कतें बनी हुई हैं तो संभावना है कि यह नॉर्मल नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि आंतों का काम पानी को एब्जॉर्ब करके स्टूल यानी मल बनाना होता है. अगर आंतों में कोई ट्यूमर (Tumor) पनपने लगे तो इस प्रोसेस में बाधा आने लगती है. इससे डायरिया हो सकता है या ट्यूमर अगर मल के रास्ते में आने लगे तो कब्ज हो सकती है. कभी दस्त और कभी कब्ज होना और दोनों ही दिक्कतें लगातार होते रहना आंतों के कैंसर का सटीक लक्षण हो सकता है. बिना डाइट बदले, बिना ट्रेवल किए और बिना किसी नई दवा के भी अगर आपके पाचन में 2 से 3 हफ्तों से ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं तो इसे इग्नोर ना करें.
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मल में रक्त आना
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मल में यानी पॉटी में खून आना या फ्रेश होने के बाद टॉयलेट बॉल में खून दिखना कैंसर का लक्षण हो सकता है. इसे ज्यादातर हेमोरॉइड्स यानी बवासीर या फिशर्स समझ लिया जाता है. लेकिन, इसे बवासीर (Piles) समझ लेना बड़ी गलती साबित हो सकता है. मल में खून नजर आने की वजह कैंसर भी हो सकती है. इसीलिए अगर मल में एक बार भी खून नजर आता है तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं.
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काली पॉटी नजर आना
काले रंग के मल (Black Potty) को ज्यादातर लोग देखकर भी नजरअंदाज कर देते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि जब ब्लीडिंग जीआई सिस्टम में, पेट या छोटी आंत में होने लगती है तो यह डाइजेस्टिव केमिकल्स के साथ मिलकर मल को काला कर सकती है. इससे मल कॉफी ग्राउंड्स जैसा भी नजर आ सकता है. अगर आपने हाल ही में चुकंदर नहीं खाया है या आयरन की दवाएं नहीं ली हैं और फिर भी मल का रंग काला दिख रहा है तो जांच कराने में देरी ना करें.
बिना कोशिश के वजन घटना
अगर कुछ हफ्तों या महीनों में बिना कोशिश के ही वजन 10 से 12 किलो कम हो गया है तो इसे हल्के में ना लें. बिना डाइट चेंज किए, बिना लाइफस्टाइल बदले या बिना एक्सरसाइज के तेजी से वजन कम होना नॉर्मल नहीं है. ट्यूमर शरीर के पोषण को छीनने लगता है या फिर कैंसर मेटाबॉलिज्म को ट्यूमर बढ़ाने में इस्तेमाल करने लगता है. ऐसे में बिना वजह वजन कम होने लगता है.
पेट फूलना और गैस
पेट फूलना और पेट में गैस (Stomach Gas) बनना एक ऐसी दिक्कत है जो आयदिन हो सकती है और इसीलिए यह कैंसर का एक बेहद ही खतरनाक लक्षण हैं क्योंकि इसे आम दिक्कत समझकर ही इग्नोर कर दिया जाता है. इसीलिए सबसे बड़े रेड फ्लैग को पहचानना जरूरी है. अगर कुछ हफ्तों तक लगातार पेट में गैस बनी रहती है तो सतर्क हो जाएं.
टेनेसमस
यह कैंसर (Colorectal Cancer) का सबसे सटीक लक्षण हो सकता है. इसे मेडिकल भाषा में टेनेसमस कहते हैं. अगर फ्रेश होने के तुरंत बाद भी आपको ऐसा महसूस होता है कि आपको बाथरूम जाने की जरूरत है तो यह टेनेसमस कहलाता है. इसमें ऐसा महसूस होता है जैसे मल अभी भी आंतों में अटका हुआ है. यह लोअर कोलन या रेक्टम में ट्यूमर होने का संकेत हो सकता है. इस हिस्से में ट्यूमर बढ़ने के कारण ब्रेन तक सिग्नल जाता है कि अब भी फ्रेश होना बाकी है जबकि असल में ऐसा नहीं होता है. कई हफ्तों तक ऐसा होता है तो इस संकेत को गंभीरता से लें.
आयरन की कमी से हुआ अनीमिया
ज्यादातर लोगों को यह आंतों के कैंसर का साइन (Aanto Ke Cancer Ke Lakshan) लगता ही नहीं है. कई बार कोलन कैंसर में एक बार में ब्लीडिंग नहीं होती बल्कि धीरे-धीरे ब्लीडिंग होने लगती है. इससे मल का रंग नहीं बदलता लेकिन हफ्तों और महीनों तक ऐसा होते रहने के कारण शरीर में आयरन की कमी होने लगती है. थकान रहती है, ब्रेन फॉग होता है और हाथ-पैर ठंडे रहने लगते हैं.
सालों तक पनपता है कोलन कैंसर
डॉ. सेठी बताते हैं कि कोलन कैंसर असल में साइलेंट होता है और सालों तक पनपता रहता है. जबतक इसके लक्षण नजर आते हैं तबतक सर्वाइल रेट कम होना शुरू हो जाता है. इसीलिए कोलन कैंसर को पकड़ने के लिए इसका एक लक्षण भी नजर आए तो तुरंत स्क्रीनिंग करानी चाहिए.
जिनकी उम्र 45 से ज्यादा है, जिनके घर में किसी को कभी कोलन कैंसर रहा हो या पॉलिप्स रहा हो, कोई बाउल डिजीज हो या घर में किसी को कभी कोलन कैंसर हो तो उस उम्र के होने से 10 साल पहले ही आपको कैंसर की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. टेस्ट से कैंसर की समय रहते पहचान हो सकती है और इलाज शुरू किया जा सकता है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.