हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

आंतों के कैंसर में दिखते हैं ये 7 लक्षण, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताया मल से मिलेंगे 3 सबसे बड़े संकेत

Colon Cancer Symptoms: आंतों के कैंसर के लक्षण आम समस्याओं जैसे लगते हैं और इसीलिए अक्सर इग्नोर कर दिए जाते हैं. लेकिन, आप यह गलती ना करें. डॉ. सौरभ सेठी कैंसर के कुछ ऐसे लक्षण बता रहे हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

विज्ञापन
कोलन कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?'

Colon Cancer Ke Lakshan: आंतों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसका शुरुआती दौर में पता लगा लिया जाए तो सर्वाइल रेट बढ़ जाता है. इसी बारे में बताते हुए गेस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने अपने यूट्यूब चैनल से वीडियो शेयर किया है. डॉक्टर बताते हैं कि आंतों के कैंसर के कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें अक्सर ही हम आम समझकर इग्नोर कर देते हैं. कई बार ये लक्षण एसिडिटी जैसे लगते हैं, कभी इन्हें बवासीर समझ लिया जाता है, कभी खराब पीरियड तो कभी तनाव मानकर नजरअंदाज किया जाता है. लेकिन, यही सबसे बड़ी गलती साबित होती है.

यह भी पढ़ें- पैर में बार-बार झुनझुनी आने के क्या कारण हैं? जानिए किन 10 दिक्कतों का लक्षण हो सकती है यह झनझनाहट

आंतों के कैंसर के लक्षण | Colon Cancer Symptoms

मलत्याग की आदत का लगातार बदलना

विज्ञापन

डॉक्टर बताते हैं कि मलत्याग की आदत का लगातार बदलना खतरे की घंटी हो सकता है. कब्ज, दस्त या दोनों होते रहना आम दिक्कत लग सकता है लेकिन बिना किसी ठोस कारण के अगर कई हफ्तों से यह दिक्कतें बनी हुई हैं तो संभावना है कि यह नॉर्मल नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि आंतों का काम पानी को एब्जॉर्ब करके स्टूल यानी मल बनाना होता है. अगर आंतों में कोई ट्यूमर (Tumor) पनपने लगे तो इस प्रोसेस में बाधा आने लगती है. इससे डायरिया हो सकता है या ट्यूमर अगर मल के रास्ते में आने लगे तो कब्ज हो सकती है. कभी दस्त और कभी कब्ज होना और दोनों ही दिक्कतें लगातार होते रहना आंतों के कैंसर का सटीक लक्षण हो सकता है. बिना डाइट बदले, बिना ट्रेवल किए और बिना किसी नई दवा के भी अगर आपके पाचन में 2 से 3 हफ्तों से ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं तो इसे इग्नोर ना करें.

मल में रक्त आना

विज्ञापन

मल में यानी पॉटी में खून आना या फ्रेश होने के बाद टॉयलेट बॉल में खून दिखना कैंसर का लक्षण हो सकता है. इसे ज्यादातर हेमोरॉइड्स यानी बवासीर या फिशर्स समझ लिया जाता है. लेकिन, इसे बवासीर (Piles) समझ लेना बड़ी गलती साबित हो सकता है. मल में खून नजर आने की वजह कैंसर भी हो सकती है. इसीलिए अगर मल में एक बार भी खून नजर आता है तो डॉक्टर से जांच जरूर कराएं.

काली पॉटी नजर आना

विज्ञापन

काले रंग के मल (Black Potty) को ज्यादातर लोग देखकर भी नजरअंदाज कर देते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि जब ब्लीडिंग जीआई सिस्टम में, पेट या छोटी आंत में होने लगती है तो यह डाइजेस्टिव केमिकल्स के साथ मिलकर मल को काला कर सकती है. इससे मल कॉफी ग्राउंड्स जैसा भी नजर आ सकता है. अगर आपने हाल ही में चुकंदर नहीं खाया है या आयरन की दवाएं नहीं ली हैं और फिर भी मल का रंग काला दिख रहा है तो जांच कराने में देरी ना करें.

बिना कोशिश के वजन घटना

विज्ञापन

अगर कुछ हफ्तों या महीनों में बिना कोशिश के ही वजन 10 से 12 किलो कम हो गया है तो इसे हल्के में ना लें. बिना डाइट चेंज किए, बिना लाइफस्टाइल बदले या बिना एक्सरसाइज के तेजी से वजन कम होना नॉर्मल नहीं है. ट्यूमर शरीर के पोषण को छीनने लगता है या फिर कैंसर मेटाबॉलिज्म को ट्यूमर बढ़ाने में इस्तेमाल करने लगता है. ऐसे में बिना वजह वजन कम होने लगता है.

पेट फूलना और गैस

विज्ञापन

पेट फूलना और पेट में गैस (Stomach Gas) बनना एक ऐसी दिक्कत है जो आयदिन हो सकती है और इसीलिए यह कैंसर का एक बेहद ही खतरनाक लक्षण हैं क्योंकि इसे आम दिक्कत समझकर ही इग्नोर कर दिया जाता है. इसीलिए सबसे बड़े रेड फ्लैग को पहचानना जरूरी है. अगर कुछ हफ्तों तक लगातार पेट में गैस बनी रहती है तो सतर्क हो जाएं.

टेनेसमस

विज्ञापन

यह कैंसर (Colorectal Cancer) का सबसे सटीक लक्षण हो सकता है. इसे मेडिकल भाषा में टेनेसमस कहते हैं. अगर फ्रेश होने के तुरंत बाद भी आपको ऐसा महसूस होता है कि आपको बाथरूम जाने की जरूरत है तो यह टेनेसमस कहलाता है. इसमें ऐसा महसूस होता है जैसे मल अभी भी आंतों में अटका हुआ है. यह लोअर कोलन या रेक्टम में ट्यूमर होने का संकेत हो सकता है. इस हिस्से में ट्यूमर बढ़ने के कारण ब्रेन तक सिग्नल जाता है कि अब भी फ्रेश होना बाकी है जबकि असल में ऐसा नहीं होता है. कई हफ्तों तक ऐसा होता है तो इस संकेत को गंभीरता से लें.

आयरन की कमी से हुआ अनीमिया

विज्ञापन

ज्यादातर लोगों को यह आंतों के कैंसर का साइन (Aanto Ke Cancer Ke Lakshan) लगता ही नहीं है. कई बार कोलन कैंसर में एक बार में ब्लीडिंग नहीं होती बल्कि धीरे-धीरे ब्लीडिंग होने लगती है. इससे मल का रंग नहीं बदलता लेकिन हफ्तों और महीनों तक ऐसा होते रहने के कारण शरीर में आयरन की कमी होने लगती है. थकान रहती है, ब्रेन फॉग होता है और हाथ-पैर ठंडे रहने लगते हैं.

सालों तक पनपता है कोलन कैंसर

डॉ. सेठी बताते हैं कि कोलन कैंसर असल में साइलेंट होता है और सालों तक पनपता रहता है. जबतक इसके लक्षण नजर आते हैं तबतक सर्वाइल रेट कम होना शुरू हो जाता है. इसीलिए कोलन कैंसर को पकड़ने के लिए इसका एक लक्षण भी नजर आए तो तुरंत स्क्रीनिंग करानी चाहिए.

जिनकी उम्र 45 से ज्यादा है, जिनके घर में किसी को कभी कोलन कैंसर रहा हो या पॉलिप्स रहा हो, कोई बाउल डिजीज हो या घर में किसी को कभी कोलन कैंसर हो तो उस उम्र के होने से 10 साल पहले ही आपको कैंसर की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. टेस्ट से कैंसर की समय रहते पहचान हो सकती है और इलाज शुरू किया जा सकता है.

यह भी पढ़ें- हरे रंग का बलगम आने का क्या मतलब है? पल्मोनोलॉजिस्ट ने बताई Green Balgam निकलने की वजह

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola