Lung Cancer Stage 1: हर साल 1 अगस्त के दिन विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस (World Lung Cancer Day) मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मकसद दुनियाभर के लोगों को फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरुक करना है. फेफड़े के कैंसर की पहचान अगर समय रहते ना की जाए तो ट्यूमर लगातार बढ़ता जाता है और जानलेवा हो सकता है. इसीलिए फेफड़ों के कैंसर के लक्षणों (Fefdo Ke Cancer) को जल्द से जल्द पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी है. यहां जानिए कैंसर की पहली स्टेज और इस स्टेज से पहले शरीर में कौन-कौन से लक्षण नजर आ सकते हैं जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए.
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फेफड़ों के कैंसर की पहली स्टेज के लक्षण | Stage 1 Lung Cancer Symptoms
सांस फूलना – थोड़ा सा भी चलने-फिरने पर या कोई काम करने पर सांस फूलने लगती है. ऐसा श्लसन नली में फ्लुइड के बिल्डअप के कारण होता है.
छाती और हड्डियों में दर्द – इस कैंसर में छाती, पीठ और कंधों में दर्द महसूस हो सकता है. फेफड़ों का कैंसर जब हड्डियों में फैल जाता है तो ऐसा होता है.
खांसी आना – हर समय खांसी आना और हफ्तों तक भी खांसी का ठीक ना होना फेफड़ों की विफलता का संकेत हो सकता है. फेफड़ों के कैंसर में अगर फेफड़े ठीक तरह से काम नहीं कर पाते हैं तो ऐसा होता है.
आवाज बदल जाना – फेफड़ों का कैंसर होने पर आवाज बदल जाती है. आवाज ज्यादा गहरी या खराश भरी सुनाई दे सकती है. ऐसा जुकाम लगने पर भी होता है लेकिन अगर दिक्कत कई हफ्तों से बनी रहे तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
भूख ना लगना, वजन घटना और थकान – अगर भूख नहीं लगती है, वजन बिना किसी कारण के तेजी से कम हो रहा है और शरीर में हर समय थकान महसूस होती है तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है. इसे इग्नोर ना करें.
किन लोगों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा ज्यादा होता है
- जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.
- जो लोग सेकंडहैंड स्मोक की चपेट में आते हैं उन्हें फेफड़ों का कैंसर हो सकता है.
- हार्मफुल सब्सटैंस जैसे रेडोन, यूरेनियम, डीजल, सिलिका या कोल प्रोडक्ट्स और टॉक्सिंस के संपर्क में आने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ता है.
- अगर परिवार में किसी को फेफड़ों का कैंसर हुआ हो तो व्यक्ति को भी हो सकता है.
फेफड़ों की कैंसर की कितनी स्टेजेस होती हैं
स्टेज 0 – फेफड़ों के कैंसर की स्टेज 0 में एब्नोरम्ल सेल्स फैफड़ों की लाइनिंग में पनपना शुरू हो जाती हैं.
स्टेज 1 – ट्यूमर का साइज 3 सेंटीमीटर से कम होता है और यह फेफड़ों से बाहर अबतर नहीं निकला होता.
स्टेज 2 – स्टेज 2 में ट्यूमर 3 सेंटीमीटर से 7 सेंटीमीटर के बीच होता है और फेफड़ों के पास के लिम्फ नोड्स, स्ट्रक्चर्स और टिशूज में फैल जाता है. लेकिन, यह अबतक किसी और अंग या दूसरे फेफड़े तक नहीं फैला है.
स्टेज 3 – ट्यूमर (Tumor) का आकार 5 सेंटीमीटर से ज्यादा बड़ा हो जाता है या आसपास की निम्फ नॉड्स, स्ट्रक्चर्स और ऑर्गंस में फैल चुका है.
स्टेज 4 – इस स्टेज में कैंसर दूसरे फेफड़े तक फैल चुका होता है, फेफड़ों और दिल के आस-पास के फ्लुइड में फैल जाता है और शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच जाता है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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